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बलरामपुर रामानुजगंज : बलरामपुर तहसील में रिश्वतखोरी का आरोप, धरने पर बैठा पीड़ित, मांगी भीख

Fri, 09 Jan 2026 07:01 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर रामानुजगंज

सार

बलरामपुर तहसील कार्यालय में दस्तावेजों के एवज में अवैध धन मांगने का एक गंभीर मामला सामने आया है। टांगरमहरी निवासी दीपक यादव ने तहसील कार्यालय के समक्ष तख्ती लेकर धरना प्रदर्शन किया।
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तहसील में रिश्वतखोरी का आरोप - फोटो : अमर उजाला
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बलरामपुर तहसील कार्यालय में दस्तावेजों के एवज में अवैध धन मांगने का एक गंभीर मामला सामने आया है। टांगरमहरी निवासी दीपक यादव ने तहसील कार्यालय के समक्ष तख्ती लेकर धरना प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि तहसील कार्यालय में पदस्थ एक बाबू और चौकीदार ने उन्हें अधिकार अभिलेख जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए ₹500 की रिश्वत मांगी, जबकि इसके लिए निर्धारित सरकारी शुल्क मात्र ₹10 था। दीपक यादव के पास ₹200 ही उपलब्ध थे और वह शेष ₹300 के लिए राजस्व अधिकारियों से “भीख” मांगने की बात कहते हुए धरने पर बैठे थे।

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प्रशासनिक जांच और धरने का घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, दीपक यादव ने लोक सेवा केंद्र में आवश्यक दस्तावेज के लिए आवेदन किया था और निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद वे तहसील कार्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि बाबू शिवनंदन पैकरा ने दस्तावेज देने के लिए ₹500 की अतिरिक्त मांग की। जब युवक ने रिश्वत देने से इनकार किया, तो उनका काम रोक दिया गया। भ्रष्टाचार से आहत दीपक यादव ने दोपहर करीब 12 बजे से एक घंटे तक तहसील कार्यालय के बाहर तख्ती लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। उनकी तख्ती पर लिखा था, “तहसील कार्यालय में ₹500 रेट फिक्स है, मेरे पास वीडियो प्रमाण भी हैं। सरकारी फीस ₹10 है, लेकिन काम के लिए ₹500 चाहिए। मेरे पास ₹200 हैं, बाकी ₹300 राजस्व अधिकारियों से भीख मांग कर देने की बात कही।” इस बीच, चौकीदार का पैसे लेते हुए एक वीडियो वायरल हो गया, जिसके बाद प्रशासनिक जांच शुरू की गई।

जांच प्रक्रिया और भविष्य की कार्रवाई
एसडीएम अभिषेक गुप्ता ने बताया कि इस मामले की जांच तहसीलदार के माध्यम से कराई जा रही है। दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। धरने के दौरान तहसीलदार स्वयं मौके पर पहुंचे और दीपक यादव से लिखित शिकायत लेने के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद दीपक यादव ने अपना धरना समाप्त किया। इस घटना ने तहसील कार्यालय में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी शिकायत की स्थिति में वे आधिकारिक माध्यमों का उपयोग करें। आरोपित बाबू और चौकीदार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोक प्रशासन में समय पर जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि नागरिकों को उनके अधिकार सुचारू रूप से मिल सकें।

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