छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए सिर दर्द बन चुके पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी को लेकर पार्टी आलाकमान सख्ती के मूड में आ गया है। सूत्रों के मुताबिक जल्द ही अजीत जोगी व उनके बेटे अमित जोगी को पार्टी से बाहर करने का फैसला लिया जा सकता है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यक्रम समन्वयक भूपेश बघेल और तीन अन्य विधायकों ने शनिवार को राहुल गांधी से मुलाकात कर अजीत जोगी की पार्टी विरोधी गतिविधियों की शिकायत की है और उन पर अनुशासानात्मक कार्रावाई करने की मांग की है।
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इस बारे में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी फैसला लेंगी।
वहीं, जोगी छत्तीसगढ़ में पार्टी के समानांतर अपना अभियान कुछ इस तरह चला रहे हैं कि अगर नेतृत्व उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करता है तो वह पार्टी से अलग होकर अपनी राह भी पकड़ सकते हैं।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में अजीत जोगी और उनके बेटे को लेकर अक्सर विवाद होता रहा है। दरभा घाटी में हुए नक्सली हमले में अजीत जोगी का नाम आने से मामला और बिगड़ गया है।
अजीत जोगी पर ये आरोप लगाए गए कि उन्हें इस हमले की पहले से जानकारी थी। उनके हेलीकॉप्टर से वापस सुरक्षित लौटने को भी शक की निगाह से देखा जा रहा है।
इस नक्सली हमले में कांग्रेस के तब के प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, वरिष्ठ नेता वीसी शुक्ल, राजनांदगांव के पूर्व विधायक उदय मुदलियार और गोपी माधवानी समेत 30 लोगों की मौत हो गई थी।
नंदकुमार पटेल को हमेशा से अजीत जोगी का प्रतिस्पर्धी माना जाता रहा है।
नक्सल हमले में हुई उनकी मौत के बाद अजीत जोगी एक बार फिर इस कोशिश में थे कि वे शायद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर जम पाएंगे लेकिन इस बार बाजी चरणदास महंत के हाथ लगी और जोगी एक बार फिर हाशिए पर पहुंच गए।
पार्टी की ओर से कोई उम्मीद न दिखने पर अजीत जोगी ने अपने बागी तेवर दिखाते हुए प्रदेश में एक व्यक्तिगत राजनीतिक रैलियों का दौर 'सर्व धर्म सभा' नाम से शुरू कर दिया है।
इन रैलियों में उन्होंने कांग्रेस के किसी बड़े नेता को न शामिल किया और न किसी का नाम लिया। इन रैलियों में अजीत जोगी अपनी ही पार्टी के कई नेताओं लेकर बयानबाजी भी कर रहे हैं, जिसकी शिकायत भी स्थानीय नेताओं ने आलाकमान से की है।
जोगी के विरोधी भूपेश बघेल ने आरोप लगाया है कि जोगी और मुख्यमंत्री रमन सिंह के बीच सांठ-गांठ है। इन परिस्थितियों में कांग्रेस के वे नेता जो अजीत जोगी को किसी तरह पार्टी में शामिल रखने का समर्थन दे रहे थे, वे भी शायद पीछे हट जाएं।