फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kanker: अजय मंडावी का कांकेर में हुआ भव्य स्वागत, लकड़ी पर उकेरी कलाओं ने दिलाई पहचान

Sat, 08 Apr 2023 09:40 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क,कांकेर

सार

पद्मश्री अजय मंडावी में कला के प्रति रूझान बचपन से ही रही है। उनकी कला छत्तीसगढ़ ही नहीं देश विदेश में भी अपनी अलग पहचान बनाती है। 
विज्ञापन
अजय मंडावी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कहते है कि कला किसी की मोहताज नहीं होती, उसे जितना उकेरा जाए निखरता ही जाता है। यह वाक्या सिद्ध कर दिखाया है पद्मश्री अजय मंडावी ने। इस आदिवासी कलाकार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कष्ट एवं शिल्प कला के लिए पद्मश्री सम्मान प्रदान किया। पद्मश्री मिलने के बाद अजय मंडावी कांकेर पहुंचे। जिनका जगह-जगह स्वागत किया गया। कांकेर में उनके पुराने मित्रों व परिजनों ने उनका भव्य स्वागत किया।

विज्ञापन


पद्मश्री अजय मंडावी बचपन से ही उड़न आर्ट का कार्य करते आ रहे है, जिनकी कला छत्तीसगढ़ ही नही देश विदेश में भी अपनी अलग पहचान बनाती है। यू तो पद्मश्री अजय मंडावी लकड़ियों को कुरेदकर कलाकृति तैयार करते है। लेकिन वह जिला जेल कांकेर में विगत 13-14 वर्षो से जेल में बंद कैदियों को कला के गुण सीखा रहे हैं। यही नहीं उन्होंने नक्सल मामले में बंद कैदियों से लेकर अन्य मामलों में बंद कैदियों को भी कला की बारीकियां सिखाकर ट्रेनिग दे चुके हैं। पूर्व में उन्हें कला के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2006 में स्टेट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। साथ ही उन्होंने अपनी कला के बल पर 40 फिट ऊंची और 22 फिट चौड़ी काष्ठ पट्टिका पर वन्देमातरम की कृति तैयार की थी। राष्ट्रभक्ति का यह संदेश गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है। कांकेर के इस आदिवासी कलाकार ने ना सिर्फ कांकेर जिले का बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें