फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

AI तकनीक से सुरक्षित होंगे छत्तीसगढ़ के जंगल: उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ स्मार्ट सर्विलांस ट्रायल

Tue, 14 Jul 2026 03:23 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

छत्तीसगढ़ में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा को आधुनिक तकनीक से मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ट्रायल शुरू किया गया है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

छत्तीसगढ़ में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा को आधुनिक तकनीक से मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ट्रायल शुरू किया गया है। इस तकनीक के जरिए जंगलों में चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी, जिससे मानव-हाथी संघर्ष, अवैध शिकार, लकड़ी तस्करी और अतिक्रमण जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण में मदद मिलेगी।
विज्ञापन


परियोजना के तहत 70 से 80 फीट ऊंचे टावरों पर AI कैमरे और पीयर-टू-पीयर (P2P) वायरलेस मॉड्यूल लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों की मदद से दूरस्थ और दुर्गम वन क्षेत्रों में वन्यजीवों के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों पर भी रियल-टाइम नजर रखी जाएगी।

फिलहाल इस तकनीक का ट्रायल ओडिशा सीमा से लगे कुल्हाडीघाट, इंदागांव, रिसगांव, दक्षिण उदंती और पायलीखण्ड उत्तर उदंती रेंज में किया जा रहा है। ये क्षेत्र हाथियों के आवागमन, वन्यजीव संरक्षण और अवैध गतिविधियों की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं।
विज्ञापन


AI कैमरे एशियाई हाथी, बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे वन्यजीवों की स्वतः पहचान करने में सक्षम होंगे। इसके अलावा यदि किसी शिकारी, लकड़ी तस्कर, अवैध घुसपैठिए या अन्य संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधि सामने आती है तो सिस्टम तुरंत वन विभाग के अधिकारियों और फील्ड स्टाफ को व्हाट्सएप के माध्यम से अलर्ट भेजेगा, जिससे समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी।

इस परियोजना की एक खास विशेषता यह भी है कि पी2पी वायरलेस तकनीक के जरिए दूरस्थ जंगलों तक इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाई जाएगी। इससे एंटी-पोचिंग कैंपों और वन चौकियों तक निर्बाध वीडियो स्ट्रीमिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी।

वन विभाग का मानना है कि सीमित मानव संसाधनों के बीच यह AI आधारित निगरानी प्रणाली फोर्स मल्टीप्लायर की तरह काम करेगी। इससे गश्त की क्षमता बढ़ेगी और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी सुनिश्चित हो सकेगी।

उल्लेखनीय है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व पहले से थर्मल ड्रोन, उपग्रह चित्रों और गूगल अर्थ इंजन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है। पिछले चार वर्षों में रिजर्व क्षेत्र से 956 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है और 500 से अधिक तस्करों व शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

वन विभाग के अनुसार, इस परियोजना के तहत लगाए जाने वाले प्रत्येक स्मार्ट टावर, AI कैमरा और आवश्यक तकनीकी उपकरणों पर लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये की लागत आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल मध्य भारत में AI आधारित वन संरक्षण की सबसे आधुनिक परियोजनाओं में से एक है और भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल बन सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें