छत्तीसगढ़ शासन ने आबकारी विभाग के अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव को बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच के बाद विशेष न्यायालय में पूरक अभियोग पत्र दाखिल होने पर विभाग ने यह प्रशासनिक कार्रवाई की। इस दौरान उनका मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय नवा रायपुर तय किया गया है, जहां उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा।
पूरक अभियोग पत्र दाखिल होने के बाद निलंबन
जांच एजेंसी ने तत्कालीन आबकारी उपायुक्त आशीष श्रीवास्तव के विरुद्ध जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने का उल्लेख अपने आदेश में किया है। एजेंसी ने मामले में 13 अक्तूबर 2026 को पूरक अभियोग पत्र तैयार करके उसे 14 अक्तूबर को विशेष न्यायालय रायपुर के समक्ष प्रस्तुत किया। इसके तुरंत बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के प्रावधानों के तहत अधिकारी को निलंबित करने का विभागीय आदेश शनिवार को जारी किया गया।
विशेष जांच दल ने इस आपराधिक प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 7-क, 8, 12 और 13 के साथ भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467, 468, 471, 120बी, 201 और 109 के तहत गहन पड़ताल की है।
प्रवर्तन निदेशालय के प्रतिवेदन पर प्राथमिकी
छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित शराब घोटाले को लेकर आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो ने 17 जनवरी 2024 को प्राथमिकी दर्ज की थी। यह कानूनी कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय से प्राप्त एक विस्तृत प्रतिवेदन और प्रारंभिक पड़ताल में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाई गई थी। इस पूरे आपराधिक मामले में आबकारी महकमे के कई वरिष्ठ अधिकारियों सहित लगभग 50 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।
प्रवर्तन निदेशालय ने 11 जुलाई, 2024 को एक गोपनीय प्रतिवेदन जांच एजेंसी को भेजा था। इस रिपोर्ट में तत्कालीन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अनिल टुटेजा तथा आबकारी अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी सहित अन्य प्रमुख लोगों की संलिप्तता का स्पष्ट उल्लेख था।
अवैध कमीशन और बिक्री के गंभीर आरोप
जांच एजेंसी के दस्तावेज के अनुसार इस पूरे तंत्र के माध्यम से आबकारी व्यवसाय में अवैध कमीशन की वसूली की जा रही थी। सरकारी मदिरा दुकानों के जरिये बिना किसी कागजी हिसाब-किताब के देसी मदिरा बेची गई। इसके साथ ही शराब निर्माण करने वाली डिस्टिलरी के बीच सांठगांठ करके बाजार में उनकी हिस्सेदारी तय करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
प्राथमिकी में यह भी उल्लेख है कि छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक पद पर रहते हुए अरुणपति त्रिपाठी ने इस पूरे अवैध नेटवर्क का संचालन करने और प्रशासनिक अनियमितताओं को अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाई थी।