यूं तो सिविल सेवा के अधिकारी अपनी विभिन्न प्रतिभाओं के जरिए गाहे बगाहे सुर्खियों में आते रहते हैं लेकिन छत्तीसगढ़ का एक आईएफएस अधिकारी कुछ अलग कारणों से दुनियाभर में भारत के नाम का डंका बजा रहा है।
इंडियन फारेस्ट सर्विस कैडर के अधिकारी एसपी मसीह कुछ अलग कारणों से ही चर्चा बटोर रहे हैं। आप ऐसे कम ही अधिकारियों का नाम जानते होंगे जो नौकरी के साथ साथ खेलों में भी उतना ही नाम कमाएं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार साल 2001 बैच के आईएफएस एसपी मसीह पावर लिफ्टिंग जैसे ताकत के खेलों में ढेरों अंतरराष्ट्रीय मेडल जीत चुके हैं। कम ही लोग जानते होंगे के उनके नाम एक वर्ल्ड टाइटल भी है।
ऐसा नहीं है कि मसीह खुद ही इस खेल में झंडा बुलंद कर रहे हैं बल्कि उनके साथ काम करने वाले आधा दर्जन से ज्यादा कर्मचारी भी ताकत के इस खेल के लिए तैयार हो चुके हैं, जो प्यार से खुद को मसीह का चेला बताते हैं।
बिलासपुर में तैनात हैं साल 2001 के IFS एसपी मसीह
सामान्य कद काठी के मजबूत शरीर वाले मसीह ने बताया कि वह पावर लिफ्टिंग में कालेज के दिनों में ही लग गए थे। उन्होंने ओपन नेशनल सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया।
नौकरी के साथ साथ खेलों में भी बराबर मेहनत करने वाले मसीह के हिस्से में बड़ी कामयाबी भी आईएफएस ज्वाइन करने के बाद आई। जब उन्होंने बीते साल अक्टूबर महीने में अमेरिका के लास वेगास में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीत दर्ज की।
वो बताते हैं कि मेरी सबसे अच्छी लिफ्ट 640 केजी (किलोग्रााम) रही। बीएससी ग्रेज्यूएट मसीह अपने विभाग में खेल के कारण ही प्रेरणास्रोत नहीं हैं बल्कि कुछ समय पहले उन्होंने इस खेल के दम पर ही अपने एक साथी कर्मचारी का पक्षघात भी ठीक कर दिया था।
यहां तैनात फारेस्ट गार्ड सिद्धनाथ पांडे साल 2011 में शरीर के बाएं तरफ कंधे से लेकर पैरों तक पक्षघात का शिकार हो गए। इसके बाद मसीह ने पावर लिफ्टिंग के माध्यम से पांडेय का इलाज शुरू किया।
साथी कर्मचारियों को भी कर रहे तैयार
जब पांडे की ट्रेनिंग शुरू हुई थी तब वह अपना हाथ एक इंच भी नहीं उठा पाते थे और न ही बाएं पैर से कुछ कदम भी चल पाते थे। पांडे बताते हैं कि आज न मैं पूरी तरह फिट हूं बल्कि वन विभाग की पावर लिफ्टिंग टीम के लिए मेडल जीतने की संभावना भी बन गई है। धन्यवाद मसीह।
मसीह कहते हैं कि किसी अन्य खेल के मुकाबले पावर लिफ्टिंग व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाती है। मसीह रोजाना चार से पांच घंटे अभ्यास करते हैं।
अब उनकी निगाहें इस साल लग्जबर्ग में अक्टूबर में होने वाली वर्ल्ड पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप पर टिकी हैं। वहीं उनके विभाग में उनके द्वारा कोचिंग पाए आधा दर्जन से ज्यादा खिलाड़ी विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपना जलवा दिखाने के लिए तैयार हैं।