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वो लंबी और हेल्दी थी तो निकाल दिया स्कूल से

Wed, 31 Jul 2013 06:13 PM IST
इंटरनेट डेस्क
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में एक अजीब सा मामला सामने आया है, यहां मल्हार नवोदय स्कूल में एक 10 साल की लड़की को हेल्दी बताकर स्कूल से निकाल दिया गया है।
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अभिजिता के पिता जयवंत व मां संगीता बच्ची के एडमिशन के लिए पखवाड़े भर से दफ्तरों का चक्कर काट रही हैं। मंगलवार को वे कलेक्टर ठाकुर रामसिंह से मिलने पहुंचे।

कलेक्टर ने उन्हें डिप्टी कलेक्टर के पास भेजा और उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के पास भेज दिया। माता-पिता जब डीईओ के पास गए तो उन्होंने डॉक्टरी रिपोर्ट को सही बताते हुए कहा कि इस मामले में वे कुछ नहीं कर सकते।
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अभिजिता का हेल्दी होना और अपने हम उम्र वालों से कुछ ज्यादा बड़ी नजर आना उसके लिए मुसीबत बन गया है।

मल्हार नवोदय विद्यालय ने ये दो कारण बताकर इस 10 वर्षीय बच्ची को स्कूल से निकाल दिया। उसकी परेशानी तब और बढ़ गई, जब डॉक्टर ने भी जांच के बाद उसकी उम्र 15 से 17 साल के बीच बता दी।

इस पूरे मामले में उसके जन्म प्रमाण-पत्र और माता-पिता के शादी के कार्ड सहित अन्य सबूतों को स्कूल प्रबंधन ने दरकिनार कर दिया है। इससे न सिर्फ अभिजीता की पढ़ाई संकट में है, बल्कि भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

अभिजिता बचपन से ही हेल्दी है। वजन व ऊंचाई भी तुलनात्मक रूप से अन्य बच्चों से अधिक है। पांचवीं तक उसने पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की और इसी दौरान नवोदय विद्यालय मल्हार की प्रवेश परीक्षा दी। सफल हो जाने पर पिता ने उसका एडमिशन नवोदय विद्यालय में छठवीं कक्षा में करा दिया।

एक हफ्ते तक सब ठीक रहा। इसके बाद एकाएक उम्र अधिक होने का हवाला देकर उसे स्कूल से निकाल दिया गया। पिता के दखल के बाद स्कूल प्रबंधन ने उसका मेडिकल टेस्ट कर रिपोर्ट मांगी। अभिजिता के पिता उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सुरेश तिवारी ने उसकी जांच की और ओपिनियन में उसकी उम्र 15 से 17 वर्ष के बीच बता दी। डॉक्टर की इस रिपोर्ट ने अभिजीता के लिए मुसीबत खड़ी कर दी।

परीक्षण में आ सकता है उम्र का अंतर
उम्र के परीक्षण में दो-तीन साल का अंतर आ सकता है। जांच करने के बाद मेडिकल बोर्ड प्रमाण पत्र जारी करता है। अगर इसमें आपत्ति है तो उसे डिवीजनल मेडिकल बोर्ड में चैलेंज किया जा सकता है। प्रमाण पत्र में सिविल सर्जन का हस्ताक्षर होता है। अगर रेडियोलाजिस्ट ने इसे जारी किया है तो यह लीगल नहीं है।- डा. अमर सिंह ठाकुर, सीएमओ
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