नक्सलियों की धीरे-धीरे टूट रही कमर
छत्तीसगढ़ में नक्सल संगठन को फिर बड़ा झटका लगा है। 71 माओवादियों ने एक साथ सरेंडर कर दिया है। वहीं सुरक्षाबलों की तरफ से लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान में कई बड़े नक्सल लीडर एनकाउंटर में ढेर हो रहे हैं। बड़े नक्सलियों की तरफ से कई बार समझौते को लेकर भी सरकार से अपील की गई है लेकिन सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं होने के बाद अब नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापस लौट रहे हैं। इसी के तहत 71 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया है।
2023 से नक्सल विरोधी अभियान में आई तेजी
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस यानी भूपेश बघेल के बाद सत्ता में आई बीजेपी की विष्णुदेव साय सरकार में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में जबरदस्त तेजी आई है। विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद ही नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए ठोस रणनीतियाँ अपनाई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2023 से अब तक लगभग 1,700 नक्सलियों ने सरेंडर किया है, जबकि मुठभेड़ों में 466 नक्सली मारे जा चुके हैं। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद विरोधी अभियानों की गति पिछले दो वर्षों में अभूतपूर्व रही है।
मार्च 2026 तक 'लाल आतंक' के खात्मे का लक्ष्य
दरअसल मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलियों का खात्मा करने का लक्ष्य रखा गया है। गृह मंत्री अमित शाह के इस ऐलान के बाद से ही प्रदेश में सुरक्षाबलों की तरफ से लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।