छत्तीसगढ़ सरकार की सख्त चेतावनी के बावजूद छत्तीसगढ़ में करीब दो हजार यात्री बसें बिना जीपीएस या वीएलटीडी उपकरण के सड़कों पर फर्राटा भर रही हैं। परिवहन विभाग ने प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर ऐसी नियम तोड़ने वाली बसों की पहचान की है। इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद विभाग ने बस संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर अपनी सफाई पेश करने का मौका दिया है। राज्य परिवहन प्राधिकार के समक्ष प्रस्तावित सुनवाई में यदि बस मालिकों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो इन बसों का परमिट रद्द किया जा सकता है।
राज्य परिवहन प्राधिकार के समक्ष होने वाली सुनवाई में बस ऑपरेटरों को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया गया है। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार राज्य में इस समय लगभग 12 हजार यात्री बसों का नियमित संचालन हो रहा है। पहले चरण में वाहनों की फिटनेस जांच के समय जीपीएस लगाना अनिवार्य किया गया था, जिसके बाद बड़ी संख्या में बसों में वीएलटीडी उपकरण स्थापित किए गए। हालांकि जांच में यह गंभीर आरोप सामने आया है कि कई बस संचालकों ने जीपीएस लगाने के बाद उसकी वायरिंग निकाल दी अथवा डिवाइस को जानबूझकर बंद कर दिया।
ऑनलाइन ट्रैकिंग से अवैध संचालन का खुलासा
अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर के अनुसार चेतावनी के बाद भी जीपीएस न लगाने या लगाने के बाद उसे बंद रखने वाले बस मालिकों को नोटिस भेजे गए हैं। प्राधिकार द्वारा इन सभी मामलों की नियमानुसार जांच की जाएगी। दरअसल परिवहन विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ बसें कर चोरी कर रही हैं और निर्धारित स्वीकृत मार्गों पर चलने के बजाय अन्य रास्तों पर अवैध रूप से संचालित हो रही हैं। इसके बाद, विभाग ने वाहनों के पंजीयन नंबर और परमिट का मिलान कर ऑनलाइन ट्रैकिंग शुरू की। जांच में पाया गया कि गाड़ियां सड़कों पर चल रही थीं लेकिन उनकी जीपीएस लोकेशन पोर्टल पर दिखाई नहीं दे रही थी। इस सूचना के बाद मैदानी टीमों, जिला आरटीओ, एआरटीओ तथा उड़नदस्तों ने मौके पर जाकर जांच की।
व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस बेद जरूरी
वाणिज्यिक वाहनों में वीएलटीडी अर्थात व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस यात्रियों की सुरक्षा तथा वाहनों की उचित निगरानी के लिए बेहद आवश्यक है। इस डिवाइस में पैनिक बटन जैसी आधुनिक सुविधा उपलब्ध रहती है, जिसके माध्यम से किसी भी आपात स्थिति में सीधे नियंत्रण कक्ष और सहायता टीमों को तुरंत संदेश भेजा जा सकता है। इससे वाहन की वास्तविक स्थिति, गति और मार्ग की निरंतर जानकारी प्राप्त होती रहती है। वाहन के निर्धारित रूट से भटकने, गलत उपयोग होने या चोरी की स्थिति में निगरानी सरल हो जाती है। सड़क दुर्घटना के समय जीपीएस से लोकेशन का सटीक पता चलने से राहत और बचाव दल समय पर घटनास्थल पर पहुंच सकते हैं। विशेषकर महिला और बाल सुरक्षा के लिए यह व्यवस्था बेहद उपयोगी है।