चंडीगढ़। कोरोना महामारी के कारण हर तरफ डर और चिंता का आलम है। लोग खुद को संक्रमण से बचाने के लिए तमाम उपाय करने में जुटे हुए हैं। ऐसे में समाज के कुछ युवा कोरोना को मात देने के बाद अपना प्लाज्मा दान कर गंभीर मरीजों की जान बचाने में जुटे हुए हैं। इन युवाओं का कहना है कि कोरोना को मात देने के बाद उन्होंने नया जीवन पाया है और उन्हें जीवन के महत्व पता चल गया है। ऐसे में वे अब दूसरों की जान बचाने का अवसर नहीं खोना चाहते। इसलिए वे आगे आकर प्लाज्मा दान कर रहे हैं । इन्होंने अन्य युवाओं से भी अपील की है कि उनकी राह पर चलकर रक्तदान और प्लाज्मा व प्लेटलेट्स दान करें ताकि किसी की अनमोल जिंदगी बचाई जा सके।
पॉजिटिव मरीज के लिए किया प्लाज्मा दान
मैं 10 बार रक्तदान कर चुकी हूं। पहली बार पॉजिटिव मरीज के लिए प्लाज्मा दान किया है। मैं 9 अप्रैल को संक्रमित हुई थी। उस दौरान ही तय कर लिया था कि जब भी किसी मरीज को प्लाज्मा की जरूरत पड़ेगी मैं बिना सोचे-समझे अपना प्लाज्मा दान करूंगी।
-निशु मेहता
रक्तदान या प्लाज्मा देने से नहीं आती कमजोरी
मैं 12 मार्च को कोरोना संक्रमित हुआ था। महामारी के इस दौर में लोगों की परेशानी देखकर एहसास हुआ कि हमें जैसे भी किसी की मदद मिलने का अवसर मिले, उसे छोड़ना नहीं चाहिए। यह सोचकर मैंने कोरोना संक्रमित मरीज को अपना प्लाज्मा दान किया। रक्तदान या प्लाज्मा देने से किसी तरह की कमजोरी नहीं आती।
-आशीष गुप्ता
आगे भी करता रहूंगा प्लाज्मा दान
मैं 20 बार रक्तदान कर चुका हूं। मुझे कभी किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। पहली बार मैंने कोरोना के मरीज के लिए प्लाज्मा दान किया है। मैं 19 मार्च को कोरोना संक्रमित हुआ था। अब मैं बिल्कुल ठीक हूं। आगे भी मैं प्लाज्मा दान करता रहूंगा ताकि किसी जरूरतमंद की जान बचाने में योगदान दे सकूं।
-गौतम जैन
अब जान गया रक्तदान का महत्व
रक्तदान के बारे में काफी समय से सोच रहा था। लेकिन जब 19 जनवरी को मैं कोरोना संक्रमित हुआ और यह पता चला कि मेरे प्लाज्मा से कोरोना के गंभीर मरीज की जान बचाने में मदद मिल सकती है। तब मैंने तय कर लिया कि मैं ठीक होकर अपना प्लाज्मा जरूर दान करूंगा । मैंने ऐसा ही किया। मैं अपनी तरह बाकी युवाओं से अपील करता हूं कि वह भी बेझिझक आगे आए और रक्तदान कर दूसरों की जिंदगी बचायें।
रश्मिल