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पीयू शासन सुधार के लिए आप भी दे सकते हैं सुझाव.. सात दिन का समय और बढ़ाया

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के शासन सुधार के लिए मांगे गए सुझावों के लिए उच्चस्तरीय समिति ने समय बढ़ा दिया है। पीयू के हितधारक अब 26 मार्च तक सुझाव दे सकते हैं। इन सात दिनों में कई महत्वपूर्ण सुझाव लोगों की ओर से दिए गए हैं। सबसे खास बात यह है कि लोगों ने पीयू में शासन सुधार की मांग की है, लेकिन इसके लोकतांत्रिक ढांचे को न बदलने को कहा है। सुझावों में बात सामने आई है कि सीनेट में सदस्यों की संख्या 91 से घटाकर 40 से 50 के मध्य ही रखी जाए। बाहरी लोगों का प्रवेश कम से कम हो। शिक्षकों को अधिक से अधिक जगह दी जाए। सीनेट के सदस्यों को सिंडिकेट में जगह न दी जाए। उसके लिए अलग से सदस्य नामित हों। सूत्रों का कहना है कि कुल मिलाकर अब तक आए सुझावों का निचोड़ यही निकल रहा है कि पीयू का लोकतांत्रिक ढांचा बना रहना चाहिए। जहां कमी हो, सुधार किया जाना चाहिए।
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पीयू शासन सुधार को चांसलर कार्यालय की ओर से उच्चस्तरीय समिति बनाई गई थी। इस समिति ने पहली बैठक करके पीयू के हितधारकों से सुझाव मांगे। इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया जो कि शुक्रवार को पूरा हो गया। सूत्रों का कहना है कि 100 से अधिक सुझाव आए हैं। पूर्व सीनेटर व पूर्व सिंडिकेट के सदस्यों के अलावा शिक्षकों ने भी अपनी राय रखी है। सूत्रों का कहना है कि पीयू से कम, लेकिन पीयू से कभी न कभी संबंध रखने वालों ने अधिक सुझाव दिए हैं। कुछ लोगों ने सुझाव इसलिए नहीं दिए कि उनका नाम कहीं सार्वजनिक न हो जाए, क्योंकि सुझाव देने से पहले नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, पद आदि के बारे में पोर्टल पूछता है और उसके बाद सुझाव देने का मौका मिलता है। पोर्टल पर सुझाव देने का लिंक https://pugovernancereforms.puchd.ac.in है। आप इस पर अपने सुझाव भेज सकते हैं।
इनसेट
नेताओं की भागीदारी कम से कम हो
सूत्रों का कहना है कि समिति की ओर से मांगे गए सुझावों में यह बात भी सामने आ रही है कि नेताओं को कम से कम जगह दी जाए। जैसे ही दलों के नेताओं का प्रवेश होता है तो राजनीति शुरू होती है। ऐसे में नेताओं की संख्या सीनेट में कम हो। साथ ही सीनेट में राजनीति करने वालों पर कार्रवाई का भी प्रावधान होना चाहिए।
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एक सप्ताह में आए सुझाव
- सीनेट में सदस्यों की संख्या घटाई जाए।
- सीनेट में स्नातक वर्ग की 15 सीटों के लिए चुनाव न होकर कम सीटों के लिए हों।
- हर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व हो, यह जरूरी नहीं।
- सीनेट के कुल सदस्यों की संख्या में से 50 फीसदी शिक्षक हों।
- डीन का चुनाव न हो, उसके लिए विशेषज्ञ लगाया जाना चाहिए।
- सीनेट व सिंडिकेट का ढांचा वही रहे, जहां कमियां हों उसी में बदलाव किया जाए।
- सीनेट चुनाव के लिए बूथ दूसरे राज्यों में न बनाए जाएं।
- सीनेट में एक बार चुनाव जीतने वाले सदस्य को दोबारा मौका न दिया जाए।
- विद्यार्थियों का प्रतिनिधि भी सीनेट में होना चाहिए।
- कर्मचारियों की संख्या पीयू में अधिक है, ऐसे में कम से कम तीन सदस्य उनके होने चाहिए।
- पीयू के हर संकाय से एक सदस्य सीनेट में जगह पाए।
- सीनेट में बहुमत के आधार पर निर्णय न हो, यह देखा जाना चाहिए निर्णय कितना सही है।
- सिंडिकेट का कार्यकाल दो साल किए जाने की बात सामने आई।
- सीनेट के चुनकर आने वाले सदस्यों के लिए योग्यता का निर्धारण हो।
इनसेट---
पुटा की आज होने वाली खुली बैठक स्थगित
पुटा की 20 मार्च को होने वाली खुली बैठक स्थगित कर दी गई। पदाधिकारियों का कहना है कि कोरोना के बढ़ते केसों को ध्यान में रखकर यह कदम उठाया गया है। जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। वहीं, दूसरी ओर कुछ शिक्षक पुटा की बैठक स्थगित के मामले को दूसरे कारणों से जोड़कर देख रहे हैं।
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