साल 2011, तारीख 2 अप्रैल... मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम का वो नजारा हर भारतीय के दिल में कभी न मिटने वाली याद के रूप में अंकित है और अंकित हैं करोड़ों देशवासियों के चेहरों पर विजयी मुस्कान बिखेरने वाले विश्व कप की खिताबी जीत के नायकों के चेहरे भी। मगर तीन साल का सफर तय कर चुके वक्त ने विश्व कप जीत में अहम भूमिका निभाने वाले युवराज, सहवाग, गंभीर, जहीर और हरभजन सिंह को उस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां से उनका करियर सिर्फ समाप्ति की ओर जाता है।
मगर युवी के पिता योगराज वर्ल्ड कप टीम के 30 संभावितों खिलाड़ियों में युवराज सिंह को जगह न मिलने से हतोत्साहित नहीं हैं।
योगराज कहते हैं कि युवी का कैरियर अभी खत्म नहीं हुआ। घरेलू मैच खेले और अच्छा प्रदर्शन करे तो उसकी जरूर नेशनल टीम में वापसी होगी। युवी चाहें तो वे खुद उन्हें फिर से कोचिंग देने को तैयार हैं।