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Chandigarh News: योग निरोग ही नहीं रखेगा, आपकी मोबाइल की लत भी छुड़ाएगा

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चंडीगढ़। मोबाइल पर घंटों समय बिताने की लत से जिन युवाओं की सेहत बिगड़ने लगती है और इंटरनेट बाधित होने पर जिन्हें लगता है कि जीवन थम गया, उनके लिए योग चमत्कारी साबित हो सकता है। बंगलूरू स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहंस) के विशेषज्ञों ने मोबाइल की लत के शिकार युवाओं पर शोध कर यह साबित किया है कि योग से इस समस्या को 70% तक काम किया जा सकता है। यही नहीं, इस लत के छूटने के साथ योग से शारीरिक और मानसिक सेहत भी बेहतर हो सकता है। इस शोध को इंटरनेशनल जनरल ऑफ योग ने स्वीकार कर लिया है।
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यह जानकारी पीजीआई में सोमवार को आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलन में आए निमहंस के इंटीग्रेटेड मेडिसिन विभाग के डॉक्टर हेमंत भार्गव ने दी। उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर यह शोध किया है। डॉक्टर हेमंत ने बताया कि वह पिछले दस वर्षों से नशा मुक्ति में योग के प्रभाव पर रिसर्च कर रहे हैं। इसके तहत निमहंस के शट क्लिनिक में आने वाले गैंबलिंग डिसऑर्डर और तकनीक की लत वाले मरीज का इलाज किया जाता है। खास बात है कि ऐसे मरीजों में युवाओं की संख्या ज्यादात है। उन्हें मोबाइल और इंटरनेट की ऐसी लत लग चुकी होती है कि वह घंटों मोबाइल पर स्क्रीन स्क्रॉल करते रहते हैं। ऐसे युवाओं पर किए गए शोध से चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। इसमें अलग-अलग मापकों के आधार पर यह बात सामने आई है कि महज तीन महीने के योग सत्र से उनमें 70% तक मोबाइल की लत की समस्या को काम किया जा सकता है।



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युवाओं को नहीं पसंद आए हल्के योग
डॉ. हेमंत ने बताया कि इस शोध में उन्होंने 18 से 24 वर्ष के बीच के 30 युवाओं को शामिल किया जो काफी समय से इंटरनेट और मोबाइल की लत जैसी समस्या के शिकार थे। उन युवाओं को योग का सत्र शुरू कराया गया। शुरुआती दौर में उन्हें धीमी गति से किया जाने वाला योग पसंद नहीं आया। वे अपनी लत के कारण तीव्र चीजों के इच्छुक थे। ऐसे में उन्हें कपालभाति, भृस्तिका और डायनामिक सूर्य नमस्कार जैसे योगासन कराए गए। डॉ. हेमंत ने बताया कि तीन महीने तक चले योग सत्र में 35 मिनट की अवधि को शामिल किया गया था, जिसमें 10 मिनट तक युवाओं से बात की जाती थी। उसके बाद दो मिनट के लिए कपालभाति, दो मिनट के लिए अनुलोम-विलोम, तीन मिनट के लिए प्राणायाम और तीन मिनट के लिए ओम का जाप कराया जाता था। इसे कई चरण में कराया गया। उन्हें खाली पेट की स्थिति में प्रतिदिन एक सत्र, भोजन के दो घंटे बाद या अगले भोजन से 30 मिनट पहले शाम के बाजार और सुबह के नाश्ते से पहले योग का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। डॉ. हेमंत ने बताया कि योग के विभिन्न आसान और प्राणायाम करने से युवकों के मन, दिमाग और शरीर के बीच नियंत्रण स्थापित होने लगा। इससे उनकी लत काफी हद तक नियंत्रित हुई ही साथ ही नींद और भूख की कमी की शिकायत भी दूर हुई। इसके साथ ही वे लोगों से मिलने जुलने लगे। महज दो हफ्ते के सत्र के बाद वह खुशी से योग करने लगे। तीन महीने तक चल अलग-अलग सत्र के बाद उनकी लत की तीव्रता जांची गई तो उसमें 70% तक गिरावट की दर्ज की गई।
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