लखवार डैम के निर्माण से जुड़ी परियोजना के लिए केंद्र की ओर से 4000 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। हालांकि अब केंद्रीय कैबिनेट में इसे स्वीकृति मिलने का इंतजार है।
इस परियोजना के तहत होने वाले निर्माण कार्य के पूरा होने से बारिश के दिनों में एकत्र पानी का इस्तेमाल खास तौर से यमुना नदी का जल स्तर पूरे वर्ष बेहतर रखने में मदद मिलेगी। इसमें हरियाणा की 48 फीसदी हिस्सेदारी है।
जबकि 52 फीसदी हिस्सेदारी अन्य प्रदेशों के लिए तय की गई है। परियोजना का सबसे बड़ा फायदा हरियाणा को यह मिलेगा कि डैम की मदद से यमुना के जलस्तर में कमी नहीं होने दी जाएगी। साथ ही नदी के तटवर्ती क्षेत्र में पानी की किल्लत काफी हद तक दूर होगी।
इस संबंध में हरियाणा के सिंचाई मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने वीरवार को भाजपा कार्यालय में पत्रकारों को यह जानकारी दी। धनखड़ ने बताया कि बारिश के दौरान प्रदेश में 20 हजार क्यूसिक या इससे अधिक भी पानी की उपलब्धता रहती है।
कुछ इलाकों में बाढ़ की भी स्थिति सामने आती है, लेकिन इससे निपटने के लिए सभी तैयारियां कर ली गई हैं। सामान्य दिनों में यमुना में 4000-5000 क्यूसिक पानी की उपलब्धता रहती है, लेकिन इस परियोजना से यमुना नदी में कभी पानी की कमी नहीं रहेगी।
धनखड़ ने चिंता जताते हुए कहा कि हर साल 40 लाख फुट एकड़ पानी व्यर्थ बह जाता है। बरसात के पानी को परंपरागत जोहड़ों में ले जाने के लिए योजनाएं तैयार करने के अलावा बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में ड्रेनों पर एक-डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर हम्प बनाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भू-जल के पुर्नभरण के लिए इंजेक्शन बोर वेल भी संचालित किए गए हैं। यह भूमिगत जल बैंक की तरह कार्य करता है। बारिश के दौरान जितना अधिक रिचार्ज होगा, उतना ही अधिक इस्तेमाल के लिए पानी की उपलब्धता रहेगी।
नहरों की री-मॉडलिंग योजनाओं पर चल रहा है काम :
धनखड़ ने कहा कि नहरी तंत्र की री-मॉडलिंग की योजनाओं पर कार्य चल रहा है। जवाहर लाल नेहरू फीडर प्रणाली के पुनर्वास के लिए 143 करोड़ रुपये की एक परियोजना तैयार की गई है।