फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जियो रे बाहुबली: बजरंग पूनिया ने किया 2018 वाला कमाल, पिता बोले- लाडले ने आजादी के महीने में फहराया तिरंगा

Sat, 06 Aug 2022 01:22 AM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)

सार

बजरंग के पिता बलवान पूनिया ने कहा कि उन्हें लाडले की काबिलियत पर पूरा भरोसा है। बजरंग जब भी मैदान में उतरा, खाली हाथ कभी नहीं लौटा। ओलंपिक में चोट के कारण बजरंग स्वर्ण पदक जीतने से चूक गया था। उस कमी को यहां पूरा कर दिया।
विज्ञापन
बजरंग पूनिया - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश के स्टार पहलवान बजरंग पूनिया ने अपने चिर परिचित अंदाज में कुश्ती में स्वर्ण जीतकर तिरंगा फहराया। हर अंक के साथ परिजनों का जोश बढ़ता रहा। तालियों के बीच बेटे ने सोना जीता तो परिजनों ने एक-दूसरे के गले लगकर खुशी मनाई। पूनिया ने 65 किलोग्राम भारवर्ग में विपक्षी पहलवान को संभलने तक का मौका नहीं दिया। राष्ट्रमंडल खेलों में बजरंग पूनिया में यह तीसरी पदक जीता है। 2014 में रजत और 2018 में स्वर्ण पदक जीता था। 

विज्ञापन


पहले मुकाबले में नॉरू के पहलवान को हराया
पहले मुकाबले में बजरंग ने नॉरू के लॉवे बिंघम को 4-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। क्वार्टर फाइनल मुकाबले में मॉरीशस के जीन गुइलिन को 6-0 से हराकर सेमीफाइनल में पहुंचे। यहां भी बजरंग ने अपने जीत के सफर को बरकरार रखते हुए सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड के जॉर्ज रैम को 10-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। 

फाइनल में कनाडा के पहलवान को हराया। लाडले का मुकाबला देखने के लिए परिजन टीवी के सामने बैठे रहे। उसके हर दांव पर तालियां बजाते रहे। जब-जब बजरंग पूनिया अंक अर्जित करते परिजन खुशी से उछल पड़ते। लगातार तालियां बज रही थीं। जब उन्होंने कनाडा के पहलवान लछलन मैकनील को 9-2 अंक के अंतर से हराया तो परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे को बधाई दी।
विज्ञापन


म्हारे शेर ने ओलंपिक की कमी को किया पूरा
बजरंग पूनिया के भाई हरेंद्र पूनिया ने कहा कि बजरंग ने कड़ी मेहनत की थी। ओलंपिक में चोट के कारण जो कमी रह गई थी, उसे राष्ट्रमंडल खेलों में पूरा कर दिया। मेरा भाई शेर की तरह लड़ा और जीत दर्ज की। शुरुआत से लेकर फाइनल तक के सफर में बजरंग ने विपक्षी पहलवानों को अंक लेने का कोई मौका तक नहीं दिया। फाइनल में कनाडा का पहलवान महज दो अंक जुटा सका। लाडले ने दिखा दिया कि वह सर्वश्रेष्ठ पहलवान है।

बजरंग की काबिलियत पर पूरा भरोसा, देश को दी सौगात
बजरंग के पिता बलवान पूनिया ने कहा कि उन्हें लाडले की काबिलियत पर पूरा भरोसा है। बजरंग जब भी मैदान में उतरा, खाली हाथ कभी नहीं लौटा। ओलंपिक में चोट के कारण बजरंग स्वर्ण पदक जीतने से चूक गया था। उस कमी को यहां पूरा कर दिया। आगे भी देश की झोली में स्वर्ण पदक डालता रहेगा। उसने उम्मीद के मुताबिक आजादी के महीने में विदेशी जमीन पर भी जीत का तिरंगा फहराया।
विज्ञापन

 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें