फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डायबिटीज से जुड़ी भ्रांतियां दूर करें, अनदेखी करेगी जिंदगी बर्बाद, पढ़ें 17 सवाल

Thu, 30 Nov 2017 05:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
डायबिटीज
विज्ञापन
वर्ल्ड डायबिटीज डे के मौके पर पढ़िए बीमारी से जुड़े 17 सवाल और उनके जवाब। जानकारियां बेहद अहम हैं, जरा सी चूक हुई तो जिंदगी बर्बाद हो गई समझो।
विज्ञापन


देश में यदि कोई बीमारी तेजी से बढ़ रही है तो वह डायबिटीज है। हाल ही में एक स्टडी में बताया गया है कि चंडीगढ़ डायबिटीज की कैपिटल बनने जा रही है। हेल्दी सिटी होने के बावजूद सिटी ब्यूटीफुल में डायबिटीज और प्री-डायबिटीज का फैलाव सबसे ज्यादा है।

14 नवंबर विश्व डायबिटीज दिवस के रूप में मनाया जाता है। डायबिटीज क्यों हो रही है, उसके क्या इलाज है, कैसे कंट्रोल किया जा सकता है, क्या बदलाव आ रहे हैं। इन सभी मुद्दों पर पीजीआई के एंडोक्रिनोलाजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. अनिल भंसाली से बातचीत की गई। डायबिटीज के क्षेत्र में डॉ. भंसाली नाम जाना-पहचाना है। पूरे देश में सबसे ज्यादा उनके रिसर्च पेपरों का हवाला दिया जाता है। प्रस्तुत है उनसे आशीष वर्मा की बातचीत।
विज्ञापन


सवाल : डायबिटीज क्या है?
जवाब : जब खून में शुगर की मात्रा एक सीमा से ज्यादा हो जाए तो उसे डायबिटीज कहते हैं। बिना कुछ खाए शुगर की मात्रा 126 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से ज्यादा हो, दिन में कभी शुगर की जांच करने पर 200 मिलीग्राम से ज्यादा और ग्लूकोज पीने के दो घंटे बाद शुगर की मात्रा 200 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से ज्यादा तो उसे डायबिटीज कहते हैं।

diabetes
सवाल : डायबिटीज के प्रकार कितने हैं?
जवाब : मुख्य रूप से दो होते हैं। एक वो जो बच्चों में होती है, उसे टाइप वन डायबिटीज कहते हैं। टाइप वन में लक्षण पहले से दिखते हैं। जैसे कि बच्चे को ज्यादा पेशाब आना, भूख लगना, वजन कम होना, ज्यादा भूख लगने के बाद भी वजन कम होना। इसके दो कारण हैं। पहला, अनुवांशिक। मतलब कि परिवार में पहले से ही किसी को टाइव वन डायबिटीज है। दूसरा, अनुवांशिक प्रवृत्ति के दौरान किसी को बचपन में वायरल इंफेक्शन, चिकन पॉक्स, मिजल्स, मम्स या रूबेला जैसी गंभीर बीमारी का होना।

इससे इम्यून सिस्टम को चोट लगती है और वह पेनक्रियाज को पहचानने से इंकार कर देता। उसके बाद इम्यून सिस्टम पेनक्रियाज को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर देता है। दूसरा प्रकार टाइप-टू डायबिटीज का है, जो मध्य आयुवर्ग (35 वर्ष के बाद) और बुजुर्गों को होता है। अक्सर ये लोग मोटे होते हैं। सबसे खास बात यह है कि 50 प्रतिशत मरीजों में इसके लक्षण नहीं दिखते हैं। इसीलिए इसे साइलेंट किलर कहते हैं। जब लक्षण नहीं होते तो व्यक्ति जांच क्यों कराएगा? इसलिए मैं इस पक्ष में हूं कि हर व्यक्ति 45 साल की उम्र के बाद डायबिटीज की जांच करवाएं।

सवाल : डायबिटीज के दौरान किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
जवाब : जैसे ही पता चले कि आपको डायबिटीज है तो डॉक्टर को दिखाएं। डॉक्टर से मिलना इसलिए जरूरी है क्योंकि वही आपको बीमारी के बारे में अच्छी तरह से समझा पाएगा। दरअसल डायबिटीज का इलाज फिक्स नहीं है। हर मरीज का इलाज अलग है। जिस मरीज को पेशाब ज्यादा आ रहा है, उसका इलाज अलग है। जिस मरीज के लक्षण नहीं है, उसका अलग इलाज है। किसी मरीज में इंसुलिन शुरू में देना पड़ सकता है तो किसी को बाद में। इसलिए डॉक्टर से मिलना जरूरी है। उसके बाद इस बीमारी की निगरानी बहुत जरूरी है। टाइप-टू डायबिटीज के मरीज को हफ्ते में कम से कम चार से पांच बार ग्लूकोज चेक करना चाहिए।

डायबिटीज
सवाल : डायबिटीज होने के बाद कितना शुगर लेवल होना चाहिए?
जवाब : मेरा मानना है कि डायबिटीज के बाद बिना कुछ खाए शुगर का लेवल 80 से 130 के बीच, खाने के बाद 140-180 के बीच होना चाहिए। जो तीन महीने में ग्लूकोज का टेस्ट, जिसे एचबीएवनसी कहते हैं, उसका लेवल सात से कम होना चाहिए। इसके अलावा डायबिटीज कंट्रोल का मतलब सिर्फ ग्लूकोज नहीं बल्कि पांच और चीजों पर नजर रखनी होगी। ये जरूरी इसलिए है क्योंकि डायबिटीज शरीर के सभी अंगों को नुकसान पहुंचाता है। ग्लूकोज के अलावा ब्लड प्रेशर (140/90), गुर्दे में खराबी है तो (130/80), खराबी नहीं है तो (140/90) होना चाहिए।

कोलेस्ट्राल (एलडीएल) 100 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम होना चाहिए। यदि हार्ट अटैक की बीमारी है तो 70 से कम होना चाहिए। वजन को कंट्रोल करना होगा। आइडियल वजन का मतलब है हाइट माइनस वजन। मान लीजिए कि किसी व्यक्ति की हाइट 5 फुट छह इंच है। इसका मतलब है कि व्यक्ति की हाइट करीब 165 सेंटीमीटर है। इसे 100 से घटा लेना चाहिए। यानी जिसकी हाइट पांच फुट छह इंच है, उसका वजन 65 किलोग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए। यह भी देखा गया है कि डायबिटीज पर फ्रेक्चर के अवसर बढ़ जाते हैं। मतलब फ्रेक्चर के रिस्क का भी आकलन कराते रहना चाहिए।

सवाल : डायबिटीज शरीर के किन-किन अंगों पर प्रभाव डालता है?
जवाब : यह बहुत धीरे-धीरे शरीर पर प्रभाव डालता है। इससे शरीर के छह अंग प्रभावित होते हैं। पहला आंख, दूसरा किडनी, तीसरी नर्व सिस्टम, चौथा हार्ट, पांचवां ब्रेन स्ट्रोक या लकवा और छठा पैर पर। यदि शुगर लेवल लंबे समय से बढ़ा है और कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं तो शरीर के इन अंगों पर प्रभाव डालता है और व्यक्ति को पता भी नहीं चलता।

डायबटीज
सवाल : किन मरीजों को इंसुलिन की जरूरत पड़ती है
जवाब : टाइप वन डायबिटीज के बच्चों को सारी जिंदगी इंसुलिन लेनी पड़ती है। इन बच्चों को कभी इंसुलिन नहीं बंद करनी चाहिए। यदि ऐसा करते है तो उनकी मृत्यु हो सकती है। टाइप टू डायबिटीज के 50 प्रतिशत मरीजों को दस से 15 साल बाद इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा टाइप टू डायबिटीज के मरीजों को हार्ट अटैक, लकवा, इंफेक्शन व निमोनिया की शिकायत होने पर इंसुलिन की आवश्यकता पड़ती है।

सवाल : किसी व्यक्ति को डायबिटीज है तो उसकी संतान पर कितना प्रभाव
जवाल : यदि पिता को डायबिटीज है तो बच्चे में 50 प्रतिशत, जिनके माता-पिता दोनों को डायबिटीज है तो 90 प्रतिशत, चाचा को है तो 25 प्रतिशत, भाई-बहन को है तो 25 प्रतिशत। इन सबके बावजूद एक राहत है यदि लाइफ स्टाइल और खानपान का ध्यान रखते हैं तो डायबिटीज को आसानी से रोका जा सकता है। रेगुलर एक्सरसाइज करें। वजन को कम करें और तनावमुक्त रहें।

सवाल : 1987 से डायबिटीज के मरीज को देख रहे हैं, तब से लेकर आज तक क्या बदलाव आया है
जवाब : डायबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ी है। मरीजों में कई तरह की नई दिक्कते आई हैं। मेरे जमाने में दो गोलियां और एक इंसुलिन होती है। अब तो आठ तरह की दवाइयां और दस इंसुलिन है। पेनक्रियाज ट्रांसप्लांट का चलन बढ़ा है। बैरिएट्रिक सर्जरी आ गई है। स्टेम सेल से इलाज किया जा रहा। इंसुलिन लगाने की तकनीक में बदलाव आया है। अब मरीज ज्यादा जीने लगे हैं। क्योंकि रेगुलर चेकअप से उनकी क्वालिटी आफ लाइफ में सुधार आया है। पहले डायबिटीज पेशेंट को हार्ट अटेक आने पर स्टेंट या बाइपास सर्जरी नहीं होती थी, लेकिन अब सर्जरी भी हो रही और स्टेंट भी पड़ रहे हैं। डायबिटीज के मरीज साल में कम से कम चार बार दिखाना चाहिए।

डायबिटीज - फोटो : Self
सवाल : महिलाओं में डायबिटीज का कितना असर है
जवाब : बराबर है। हाल ही में देश के 15 स्टेट में स्टडी हुई है, जिसमें पाया कि डायबिटीज का अनुपात महिला और पुरुष दोनों में बराबर है। हालांकि महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले ज्यादा मोटापा है। हमारा डाटा बताता है कि 50 प्रतिशत महिलाओं में मोटापा है, जबकि 40 प्रतिशत पुरुषों में। इसके बावजूद दोनों में डायबिटीज बराबर है। पहले यह माना जाता था कि मासिक धर्म बंद होने के बाद महिलाओं में हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन डायबिटीज होने के कारण मासिक धर्म बंद होने से पहले हार्ट अटैक का खतरा बढ़ गया है।

सवाल : शुगर लेवल बढ़ने से क्या सेक्स संबंधी समस्या आती है।
जवाब : अनकंट्रोल डायबिटीज से पुरुष और महिलाओं दोनों पर असर पड़ता है। ये सवाल हम लोग अक्सर कम पूछते हैं। कई बार मरीज भी संकोच करता है। इस संबंध में हमने एक स्टडी भी पब्लिश की है, जिनमें देखा गया है कि 70 प्रतिशत पुरुषों में सेक्स की इच्छा खत्म हो जाती है। करीब 50 प्रतिशत लोगों की इंद्री का तनाव खत्म होता है। 50 प्रतिशत महिलाओं में भी सेक्स की इच्छा खत्म होती है। साथ ही डायबिटीज बढ़ती है तो फर्टिलिटी भी कम होती है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा समस्या होती है। जिन महिलाओं में पीसीओडी होता है, उनमें भी डायबिटीज होने के चांस बढ़ जाते हैं।

सवाल : डायबिटीज के क्षेत्र में क्या-क्या नए शोध हो रहे हैं।
जवाब : चार नई ऐसी चीजें आ रही हैं, जो डायबिटीज के क्षेत्र में क्रांति होगी। पहला, पेनक्रियाज को पुर्नजीवित करने के लिए दवाइयों पर काम चल रहा है। दूसरा, कई तरह की नई इंसुलिन आ रही है। अभी जो इंसुलिन लगाई जा रही है, उसे खून में पहुंचने में कम से कम 30 मिनट का समय लगता है। आने वाली नई इंसुलिन में मात्र पांच मिनट में अपना असर दिखाने लगेगी। पीजीआई में इसका ट्रायल अभी खत्म हुआ है। वीकली इंसुलिन की बात चल रही है। अभी कुछ मरीजों को दिन में दो बार दी जाती है, जबकि बच्चों को चार बार। ओरल इंसुलिन पर भी बात चल रही है। स्टेम सेल पर भी काम चल रहा है। इसमें हमने दिखाया है कि स्टेम सेल लगाने से इंसुलिन का डोज कम होता है और डायबिटीज को आसानी से कंट्रोल होता है।

डायबिटीज, हेल्‍थ - फोटो : फाइल फोटो
सवाल : डायबिटीज होने पर लोग आयुर्वेदिक दवा भी लेते हैं
जवाब : मेरा मानना है कि अल्टरनेटिव मेडिसिन का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। किसी ने कहा कि करेला खाइए। करेला पर कोई स्टडी नहीं है। जबकि इतना बड़ा आयुष मंत्रालय है। कभी इस पर काम नहीं किया। करेला, जामुन व मेथी दाना पर कभी कोई काम नहीं हुआ। मगर फिर भी मैं कहना चाहूंगा कि इसे खाते रहिए क्योंकि ये रुटीन की चीजें हैं। इसका कोई नुकसान नहीं है, मगर हमारी दवा जरूर खाइए। क्योंकि हमें पता है कि हमारी दवा काम करती है। टाइप वन डायबिटीज के बच्चे कभी भी अल्टरनेटिव दवा न खाएं। क्योंकि इंसुलिन बंद हुई तो उनकी मृत्यु हो सकती है।

सवाल : चंडीगढ़ को एजुकेट सिटी के नाम से जाना जाता है, मगर पूरे देश में डायबिटीज सबसे ज्यादा यहां है
जवाब : इसके तीन कारण हैं। पहला, चंडीगढ़ में वृद्ध लोग काफी रहते हैं। वृद्ध लोगों में डायबिटीज ज्यादा होती है। दूसरा, 20-40 साल की उम्र के करीब दो तिहाई लोग एक्सरसाइज नहीं करते। तीसरा, जहां भी जीडीपी ज्यादा होती वहां पर डायबिटीज ज्यादा होती है। क्योंकि वे वैराइटी फूड ज्यादा खाते हैं और जिसमें शुगर और फैट की मात्रा ज्यादा होती है।

सवाल : आजकल शुगर फ्री की काफी बात चल रही है। क्या कहना है
जवाब : मेरे ख्याल से शुगर फ्री ठीक है। क्योंकि डायबिटीज लोगों में चीनी खानी की ज्यादा इच्छा होती है क्योंकि उनकी जीभ में शुगर की संवेदना खत्म हो जाती है। आप ने एक चम्मच चीनी खाई तो आपको ज्यादा लगेगी, मगर डायबिटीज के पेशेंट को कम लगेगी। उनके टेस्ट बर्ड में उस बर्ड में भी शुगर की संवेदना खत्म हो जाती है। मेरे ख्याल से शुगर फ्री के तीन से चार गोली आराम से रोज ले सकते हैं।
विज्ञापन

डायबिटीज, हेल्‍थ - फोटो : फाइल फोटो
सवाल : डायबिटीज के क्या इंडीकेटर होते हैं
जवाब : 50 प्रतिशत लोगों में कोई लक्षण नहीं होता है। इंटरनेशनल गाइडलाइंस है कि 45 साल के बाद हर पुरुष व महिला साल में एक बार डायबिटीज का चेकअप कराए। हम तो कहेंगे कि 40 साल की उम्र के बाद हर महिला और पुरुष साल में एक बार डायबिटीज की जांच करवाए। इसमें चार चीजें जरूर जांचे। वजन, ब्लड प्रेशर, फास्टिंग शुगर और कोलेस्ट्राल मापे और उन लोगों को होशियार रहने की जरूरत है। जिनमें मोटापा है, फैमिली हिस्ट्री है, जिन्हें प्रेगनेंसी में हुई है और जिन बच्चों का बर्ड वेट ढाई किलो से कम और चार किलो से ज्यादा होता है उनमें संभावना ज्यादा है।

सवाल : क्या डायबिटीज के मरीज शराब पी सकते हैं
जवाब : नहीं। हम तो कहेंगे कि कोई भी व्यक्ति शराब न पीए। पहले कहा जाता था कि सेहत के लिए 30 एमएल और 60 एमएम शराब नुकसान नहीं पहुंचाती। दरअसल शराब पीने के बाद लोग हैवी खाना खाते हैं। जो शरीर में चर्बी के रूप में जमा होता है। इससे वजन बढ़ता है। किसी भी व्यक्ति या मरीज को सिगरेट और शराब नहीं पीनी चाहिए, क्योंकि दोनों ही बीमारी और मृत्यु को बढ़ाती है।

सवाल : आखिरी सवाल, डायबिटीज के क्षेत्र में क्या योगदान रहा है।
जवाब : योगदान के बारे में क्या कहेंगे। थोड़ी देर रुकने के बाद...। कुछ चीजें नई हैं। हमारा सबसे महत्वपूर्ण रोल यह रहा है कि आईसीएमआर की ओर से चंडीगढ़ और पंजाब में दो स्टडी हुई है, जिसमें हमने बताया है कि चंडीगढ़ और पंजाब में डिजीज बर्डन कितना है। हमने यह बताया है कि पेट के रोग डायबिटीज होने में कितने सहायक हो सकते हैं। तीसरा स्टेम सेल, चौथा पेनक्रियाज ट्रांसप्लांट और पांचवां बैरिएट्रिक सर्जरी। तीनों ही काम को हमने शुरू किया और उसे प्रमोट भी किया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें