12वीं के बाद 2012 में करनाल के हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल एविएशन (एचआईसीए) में दाखिला लिया। इसी दौरान उन्होंने अपनी बीएससी भी पूरी कर ली। जब पहली बार ग्लाइडर में उड़ान भरी तो बता नहीं सकती कि कितनी खुश थी, उड़ान के बाद मम्मी-पापा को फोन कर अपनी खुशी जाहिर की। 2014 में फ्लाइंग ट्रेनिंग के दौरान कानपुर के नजदीक उनका ग्लाइडर क्रैश कर गया था।
माता-पिता को बेटी पर मान
पिता गुरचरण सिंह यहां गांव में ही अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेती करते हैं। वहीं माता कुलदीप कौर गृहणी हैं। माता-पिता का कहना है कि 2014 में हुए हादसे को वे भुलाकर अपनी बेटी का हर जगह हौसला बढ़ा रहे हैं। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि शीघ्र ही उनकी बेटी पायलट बनकर सपने को सच करेगी। पिता गुरचरण सिंह उसे प्यार से भोला पायलट बुलाते हैं।
लड़कियों की शिक्षा के बारे में अभिभावकों को लंबे समय से चली आ रही लोक धारणा लोक की कहणगे से बाहर निकलना चाहिए। वहीं समाज में बेटियों पर बढ़ रहे अत्याचार पर उनका कहना है कि सभी अभिभावक अपने बेटों को लड़कियों की इज्जत करना सिखाएं।