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महिला दिवसः 2014 में ग्लाइडर क्रैश में हुई चोटिल, नहीं हारी हिम्मत, पायलट बनेगी किसान की बेटी

Fri, 08 Mar 2019 12:36 AM IST
ajay kumar सुमित सिंह विर्क, अमर उजाला, ऐलनाबाद (सिरसा)
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किसान की बेटी गुरप्रीत सौखल
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2014 में फ्लाइंग ट्रेनिंग के दौरान कानपुर के पास उनका ग्लाइडर क्रैश कर गया। चोट से उभरने और पूरी तरह स्वस्थ होने में उन्हें दो साल लग गए। इस दौरान कई बार उसके मन में विचार आया कि उनका पायलट बनने का सपना अब पूरा नहीं होगा। उधर माता-पिता हर समय हौसला बढ़ाते रहे, उन्हीं की बदौलत अब उनका पायलट बनने का विश्वास पहले से भी मजबूत हो चुका है। 

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इन दिनों वह अमेरिका की एंबर-रिडल ऐरोनोटिकल यूनिवर्सिटी से एविएशन में मास्टर डिग्री कर रही हैं। शीघ्र ही बकाया ट्रेनिंग पूरी कर वह पायलट बनने के सपने को सच कर लेगी। यह कहानी है गांव अमृतसर खुर्द निवासी एक साधारण किसान गुरचरण सिंह की 24 वर्षीय पायलट बेटी गुरप्रीत सौखल की। 

बुलंद हौसले वाली गुरप्रीत बताती हैं कि बचपन से ही वह पायलट बनने का सपना था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा चंडीगढ़ में रहकर पूरी की। जब वह 9वीं कक्षा में थी तो स्कूल में मेहमान बनकर आए मोटिवेशनल स्पीकर सभी बच्चों से उनके जीवन का लक्ष्य पूछ रहे थे। यह पहली बार था, जब उन्होंने पायलट बनने की अपनी बात को दूसरों के सामने रखा। 

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12वीं के बाद 2012 में करनाल के हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल एविएशन (एचआईसीए) में दाखिला लिया। इसी दौरान उन्होंने अपनी बीएससी भी पूरी कर ली। जब पहली बार ग्लाइडर में उड़ान भरी तो बता नहीं सकती कि कितनी खुश थी, उड़ान के बाद मम्मी-पापा को फोन कर अपनी खुशी जाहिर की। 2014 में फ्लाइंग ट्रेनिंग के दौरान कानपुर के नजदीक उनका ग्लाइडर क्रैश कर गया था। 

माता-पिता को बेटी पर मान
 पिता गुरचरण सिंह यहां गांव में ही अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेती करते हैं। वहीं माता कुलदीप कौर गृहणी हैं। माता-पिता का कहना है कि 2014 में हुए हादसे को वे भुलाकर अपनी बेटी का हर जगह हौसला बढ़ा रहे हैं। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि शीघ्र ही उनकी बेटी पायलट बनकर सपने को सच करेगी। पिता गुरचरण सिंह उसे प्यार से भोला पायलट बुलाते हैं। 

लड़कियों की शिक्षा के बारे में अभिभावकों को लंबे समय से चली आ रही लोक धारणा लोक की कहणगे से बाहर निकलना चाहिए। वहीं समाज में बेटियों पर बढ़ रहे अत्याचार पर उनका कहना है कि सभी अभिभावक अपने बेटों को लड़कियों की इज्जत करना सिखाएं।
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