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Chandigarh News: महिला को नहीं मिली यात्रा की अनुमति, वीजा कंपनी पर लगाया 25 हजार का हर्जाना

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चंडीगढ़। वीजा कंपनी द्वारा महिला की असल उम्र को तीस साल बढ़ाने की वजह से उनकी रद्द हुई हो गई। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कंपनी पर 25 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। साथ ही आयोग ने वीजा सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी को गलती के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए करीब 94 हजार रुपये लौटाने और केस खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए हैं। दायर याचिका के तहत आरोपी वीजा कंपनी ने उसके जन्म का वर्ष गलत दर्शाते हुए 1985 के बजाय 1955 कर दिया। इसके चलते एयपोर्ट पर उन्हें फ्लाइट में चढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। जिस पर पीड़िता की ओर से आयोग में याचिका दायर की गई थी।
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वहीं, कंपनी की ओर से आयोग में दिए गए जवाब में कहा गया कि जनरल डायरेक्टरेट ऑफ रेजीडेंसी एंड फॉरेनर्स अफेयर्स-दुबई (जीडीआरएफए) यात्रा वीजा जारी करने के लिए जिम्मेदार था। फर्म ने कहा कि उसे दस्तावेज 24 जनवरी 2019 को प्राप्त हुआ था और उसी दिन इसे शिकायतकर्ता को भेज दिया गया था। हालांकि आरोपी ने दावा किया कि शिकायतकर्ता ने 13 फरवरी को ही इस मुद्दे को उनके ध्यान में लाया था, जिस दिन उन्हें फ्लाइट में चढ़ना था।

क्या था मामला
एसएएस नगर की रहने वाली राजवीर कौर ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में दायर की याचिका में बताया कि उन्हें अपने बेटे के साथ दुबई जाना था। इसके लिए वीजा लगवाने संबंधी औपचारिकताओं को देखने और पूरा कराने के लिए आरोपी कंपनी साई ग्लोबल को नियुक्त करते हुए जिम्मेदारी सौंपी थी। शिकायतकर्ता ने पर्यटक वीजा के लिए 12 हजार 400 रुपये खर्च करते हुए अदा किए थे। कंपनी की ओर से शिकायतकर्ता के लिए गोआईबिबो के जरिए 13 से 17 फरवरी के लिए पैकेज बुक कराया गया। पैकेज के लिए 59 हजार 259 रुपये का भुगतान किया गया, जिसमें होटल शुल्क और हवाई यात्रा सभी शामिल थी। आरोपों के मुताबिक जब शिकायतकर्ता एयरपोर्ट पर पहुंची तो अधिकारियों ने वीजा की जांच में पाया कि वीजा में जन्म का वर्ष गलत लिखा गया है। उनका जन्म 1985 का था,जिसे 1955 दर्शाया गया था। इसलिए उसे उड़ान में चढ़ने की अनुमति नहीं दी गई।
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