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Chandigarh: बिना एंडोस्कोपी अब पता चल सकेगी म्यूकोसा की वास्तविक स्थिति, PGI के विशेषज्ञ ने बनाई डिवाइस

Sun, 20 Nov 2022 09:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह वीणा तिवारी, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

पीजीआई के विशेषज्ञ ने इलेक्ट्रिक माइक्रो चिप डिवाइस बनाई है। इससे सूजन और कैंसर के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। इसमें एंडोस्कोपी की जरूरत नहीं पडे़गी।
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विस्तार
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चंडीगढ़ पीजीआई के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की प्रमुख ने एक ऐसी इलेक्ट्रिक माइक्रो चिप डिवाइस बनाई है जो कैथेटर के माध्यम से शरीर के अंदर जाकर म्यूकोसा की वास्तविक स्थिति की जानकारी देगी। इसमें एंडोस्कोपी की जरूरत नहीं पडे़गी। डिवाइस की उपयोगिता को देखते हुए विभाग ने इसे पेटेंट भी करा लिया है। जल्द ही यह डिवाइस बाजार में उपलब्ध होगी।

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इस डिवाइस के बाजार में आने के बाद छोटे स्वास्थ्य केंद्रों पर बिना एंडोस्कोपी के मरीजों की महत्वपूर्ण जांच हो सकेगी। इसका नाम इम्पीडेंसी स्पेक्ट्रोस्कोपी डिवाइस रखा गया है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की प्रमुख व डिवाइस बनाने वाली प्रो. ऊषा दत्ता ने बताया कि म्यूकोसा की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए मौजूदा समय में एंडोस्कोपी का सहारा लेना पड़ता है लेकिन यह सुविधा  हर जगह नहीं होती। ऐसे में कम खर्च में इस जांच को सर्व सुलभ बनाने के लिए उन्होंने यह चिप तैयार की है। 

232 मरीजों पर किया परीक्षण
प्रो. ऊषा दत्ता ने बताया कि चिप के परीक्षण के लिए ऐसे 232 मरीजों को चिह्नित किया गया, जो सूजन (बैक्टीरियल संक्रमण) और कैंसर से ग्रसित थे और उनकी सर्जरी होने वाली थी। इसमें महिलाओं की संख्या 68 प्रतिशत थी। चिप के प्रयोग से परिणाम सामने आया कि उनमें से 32 प्रतिशत में म्यूकोसा की स्थिति नॉर्मल सेगमेंट से कम मिली।
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इस परिणाम के आधार पर उनके इलाज की आगे की प्रक्रिया संबंधी निर्णय लेने में काफी मदद मिली। वहीं एंडोस्कोपी की जरूरत भी नहीं पड़ी। चिप के माध्यम से मरीज के म्यूकोसा में माइक्रो करंट प्रवाहित किया जाता है ताकि जिन जगहों पर म्यूकोसा प्रभावित होता है वहां तरंग उत्पन्न होने लगती है। उस तरंग के आधार पर डायग्नोसिस किया जा सकता है। 

जानिए म्यूकोसा क्या है और उसका क्या काम है 
श्लेष्मिक कला या श्लेष्मल झिल्ली (म्यूकस मेंबरेन या म्यूकोसा) वह झिल्ली है जो शरीर के आंतरिक अंगों को घेरे रहती है और सभी गुहाओं (कैविटीज) की सबसे ऊपरी परत होती है। श्लेष्मिक कला, उपकला कोशिकाओं के एक या अधिक परतों से बनी होती है। गैस्ट्रिक म्यूकोसा दो प्राथमिक उद्देश्यों को पूरा करता है। इसमें पेट में भोजन के द्रव्यमान को चिकना करना और पेट के भीतर गति को सुगम बनाना, पेट की दीवार को एसिड और पाचन एंजाइमों से बचाने के लिए एक सुरक्षात्मक अवरोध बनाना शामिल है। इसके साथ ही म्यूकोसा मुंह के अंदर की त्वचा है, जिसमें गाल और होंठ शामिल हैं। मुंह के म्यूकोसा रोगों वाले लोगों को इस स्तर पर दर्दनाक मुंह के छाले या अल्सर विकसित हो सकते हैं। ठीक इसी तरह पेट के अंदर भी ये होता है। 

इन्हें खतरा ज्यादा
महिलाओं को इसका ज्यादा खतरा होता है। यदि कैंसर का इलाज करवाया हो। कैंसर के इलाज से पहले और उसके दौरान मुंह में सूखेपन का अनुभव हुआ हो। शरीर में पानी की कमी होना। गुर्दे की बीमारी या मधुमेह जैसी पुरानी स्थिति होना। असामान्य रूप से कम बॉडी मास इंडेक्स होना। मौखिक स्वास्थ्य खराब होना। चबाने या धूम्रपान करने वाला तंबाकू का सेवन करना। शराब पीने वाले लोग।
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लक्षण पर गौर करें
मुंह में सूखापन, मुंह की लार का गाढ़ा होना, ज्यादा मात्रा में बलगम, सूजे हुए या लाल मसूड़े, जीभ पर नरम, सफेद पैच या मवाद, मुंह में छाले
मुंह में खून, भोजन करते समय दर्द या हल्की जलन, निगलने या बात करने में परेशानी होना।

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