20 साल में पहली बार नेता प्रतिपक्ष के लिए करना पड़ रहा इतना लंबा इंतजार
कांग्रेस ने चार पर्यवेक्षक भेजे थे, लेकिन विधायकों ने हाईकमान पर फैसला छोड़ा
कांग्रेस हाईकमान तय नहीं कर पाया विधायक दल का नेता
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में नई सरकार के गठन के बाद नवंबर में ही हरियाणा विधानसभा का शीतकालीन सत्र होने वाला है। संभावना है कि नवंबर के बीच में सत्र बुलाया जा सकता है। लेकिन विधानसभा को पहली बार नेता प्रतिपक्ष के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। भाजपा को इस बार पूर्ण बहुमत मिला है, जबकि कांग्रेस 37 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही है। ऐसे में कांग्रेस विधायक दल का नेता ही सदन में नेता प्रतिपक्ष होगा। लेकिन कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष का नाम तय नहीं कर पाई है। बीती आठ अक्तूबर को परिणाम जारी हुए थे और 17 अक्तूबर को हरियाणा सरकार का गठन हुआ था। इतने दिन बीत जाने के बाद भी कांग्रेस की ओर से विधायक दल का नेता नहीं चुन पाई है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 20 साल में ऐसा पहली बार हो रहा कि हरियाणा को नेता प्रतिपक्ष के लिए इतना लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इसका मुख्य कारण पिछले तीन चुनाव में कांग्रेस को लगातार मिली हार है। 2009 में भी कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से पीछे रह गई थी। 2005, 2009, 2014 और 2019 में चुनाव परिणाम के बाद करीब 15 दिन के अंदर नेता प्रतिपक्ष चुन लिए गए थे। नेता चुनने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने 18 अक्तूबर को चार पर्यवेक्षक भेजे थे, लेकिन विधायक दल की बैठक में हाईकमान पर फैसला छोड़ दिया गया। इसके बाद से कांग्रेस हाईकमान कोई फैसला नहीं ले पाया है।