काफी देर तक चले ड्रामे के बाद शराब के 9 ठेकों को प्रशासन ने सील कर दिया। बाद में लाइसेंस फीस जमा होने की पुष्टि के बाद सभी शराब के ठेकों की सील रात को ही खोल दी गई। ठेकों के मालिक ने एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग के अधिकारियों पर जानबूझ कर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।
लीकर वर्ल्ड वेंचर कंपनी को 15 नवंबर तक ब्याज सहित ठेकों की लाइसेंस फीस जमा करवानी थी। ऐसा नहीं कर पाने पर विभाग ने वीरवार 17 नवंबर को सभी ठेकों को सील कर दिया। जबकि ठेकों के मालिक ने फीस जमा करवाने के बावजूद ठेके सील किए जाने का आरोप लगाया है।
सेक्टर-26 मध्यमार्ग पर स्थित शराब के ठेके को सील करते समय विभाग के अधिकारियों और कंपनी के मालिक के बीच काफी बहस भी हुई। कंपनी के मालिक कमल बजाज मौके पर मौजूद एक्साइज एंड टैक्सेशन अफसर (ईटीओ) से सील करने के ऑर्डर की मूल कॉपी मांगते रहे।
ऑर्डर की फोटोकॉपी से वह संतुष्ट नहीं थे। वहीं दूसरी ओर विभाग के अधिकारी कमल बजाज से फीस जमा करवाने की रसीद मांगते रहे। एक से डेढ़ घंटे तक यही ड्रामेबाजी चलती रही। विरोध बढ़ते देख पुलिस फोर्स को मौके पर बुलाना पड़ा। पुलिस की मौजूदगी में ही सभी ठेकों को सील किया गया।
ठेकेमालिक कमल बजाज ने ठेके सील करने को सोची समझी साजिश बताया। उन्होंने कहा कि वह 16 नवंबर को सभी ठेकों की पूरी ढाई करोड़ रुपये फीस जमा करवा चुके हैं। दो ग्रुप की फीस डिमांड ड्राफ्ट के रूप में बैंक में और दो की सेंट्रल ट्रेजरी में जमा करवाई है।
फीस जमा होने की पुष्टि के बाद ठेके खोल दिए गए
शराब ठेका सील
- फोटो : अमर उजाला
इसके बावजूद ठेकों को सील कर दिया गया। इतना ही नहीं ठेके सील करने से पहले उन्हें नोटिस तक नहीं दिया गया। वह प्रशासन को करोड़ों रुपये का रेवेन्यू जुटा कर देते हैं इसके बावजूद ठेकों को सील कर उनका नाम खराब किया गया।
कमल ने प्रेस वार्ता कर यह आरोप अधिकारियों पर लगाए। कमल ने कहा कि एईटीसी रविंद्र कौशिक हरियाणा से डेपुटेशन पर हैं और वह पंजाब के है इसलिए वह उन्हें परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह इसके खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे।
फीस जमा होने की पुष्टि के बाद ठेके खोल दिए गए
दूसरे सभी ग्रुप समय पर अपनी लाइसेंस फीस जमा करवा चुके हैं। लीकर वर्ल्ड वेंचर कंपनी को 15 नवंबर तक ब्याज सहित फीस जमा करवानी थी। बार-बार सूचना दिए जाने के बाद भी कंपनी ने फीस जमा नहीं करवाई।
बुधवार को कंपनी के मालिक कमल बजाज के साथ उच्चाधिकारियों की मीटिंग भी हुई थी। लेकिन उन्होंने फीस जमा करवाने की सूचना नहीं दी। सील करने से पहले अधिकारी कंपनी मालिक से फीस जमा करवाने की रसीद मांगते रहे, लेकिन नहीं दिखाने पर ठेके सील करने पड़े।
इससे पहले भी एक बार ऐसा हो चुका है जब टीम ठेके को सील करने पहुंची तो मौके पर रसीद दिखाई गई और सील नहीं किए गए। 16 नवंबर को फीस जमा करवाने की पुष्टि होने पर सभी ठेके खोल दिए गए हैं। 15 दिन का ग्रेस पीरियड निकलने के बाद ठेकों को सीधा सील किया जाता है। इसके लिए कोई नोटिस नहीं देना होता। -रविंद्र कौशिक, एईटीसी, चंडीगढ़।