तीन जुलाई को होने वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक पर सभी की निगाहें हैं। इस बैठक में केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चा है। इसके बाद हरियाणा में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में मोदी कैबिनेट में हरियाणा का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के कयास हैं। इसका मुख्य कारण अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव हैं। सीएम मनोहर लाल विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ कराने पर सहमत हैं।
मोदी के पहले कार्यकाल में हरियाणा से थे चार मंत्री
वर्ष 2014 में हरियाणा के चार चेहरे मोदी मंत्रिमंडल का हिस्सा थे। लोकसभा चुनाव जीते राव इंद्रजीत सिंह और कृष्णपाल गुर्जर को मंत्री बनाया गया था। वहीं चौधरी बीरेंद्र सिंह और सुरेश प्रभु हरियाणा से राज्यसभा पहुंचे। इसके बाद उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वहीं विदेश मंत्री रहीं दिवंगत सुषमा स्वराज भी हरियाणा के अंबाला की रहने वाली थीं।
हरियाणा की सभी सीटों पर खिला था कमल
2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा को हरियाणा में प्रचंड जीत मिली। भाजपा ने हरियाणा की सभी 10 सीटों पर जीत कर इतिहास रचा। वहीं मोदी के दूसरे कार्यकाल में हरियाणा के तीन चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। इनमें गुरुग्राम से सांसद राव इंद्रजीत सिंह को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), फरीदाबाद से सांसद कृष्णपाल गुर्जर को सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री और अंबाला से सांसद रहे रतन लाल कटारिया को जलशक्ति राज्यमंत्री बनाया गया था। हालांकि बाद में कटारिया से मंत्री पद वापस ले लिया गया था।
जातीय गणित भी समझें
मौजूदा समय में हरियाणा से अनुसूचित जाति से सुनीता दुग्गल इकलौती सांसद हैं। वहीं ब्राह्मण समाज से दो सांसद हैं। इन्होंने हुड्डा पिता-पुत्र को हराया था। इनमें रमेश कौशिक ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सोनीपत और रोहतक से दीपेंद्र हुड्डा को डॉ. अरविंद शर्मा ने पराजित किया था। इसके अलावा पूर्व मंत्री बीरेंद्र सिंह के पुत्र बृजेंद्र सिंह जाट समाज से हैं।
इसके अलावा पंजाबी समाज से संजय भाटिया और सैनी समाज से नायब सैनी मुख्यमंत्री सांसद हैं। अब देखना है कि अगर केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल होता है तो क्या हरियाणा के किसी चेहरे को शामिल किया जाएगा या नहीं।