-2025 की अधिसूचना को चुनौती, पंजाब सरकार से मांगा जवाब
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में नशा मुक्ति केंद्रों के लिए अधिसूचित नए नियमों को लेकर दायर जनहित याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि दिसंबर 2025 में बनाए गए इन नियमों के क्रियान्वयन पर रोक क्यों न लगा दी जाए।
यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और सहजधारी सिख पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष परमजीत सिंह रानू ने अपने अधिवक्ता आशुतोष जैरथ के माध्यम से दायर की है। याचिका में ‘पंजाब सब्स्टेंस यूज डिसऑर्डर ट्रीटमेंट, काउंसलिंग एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर्स रूल्स, 2025’ को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है।
संविधान और मानसिक स्वास्थ्य कानून के उल्लंघन का आरोप
याचिकाकर्ता का कहना है कि ये नियम संविधान के प्रावधानों के साथ-साथ मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 और उससे जुड़े नियमों के खिलाफ हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार इन नियमों के जरिए निजी ओपीडी आधारित नशा मुक्ति केंद्रों को वैध बनाने का प्रयास कर रही है। इससे ब्यूप्रेनोर्फिन और ब्यूप्रेनोर्फिन-नालोक्सोन जैसी अत्यधिक नशे की लत लगाने वाली ओपिओइड दवाओं की अनियंत्रित आपूर्ति का खतरा बढ़ सकता है। याची ने तर्क दिया कि इन दवाओं का उपयोग केवल भर्ती मरीजों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की कड़ी निगरानी में ही किया जाना चाहिए। वर्तमान नियमों में प्रति केंद्र 25 मरीजों की सीमा तय होने के बावजूद नए प्रावधान इसके विपरीत बताए गए हैं।
पुराने आदेश को कमजोर करने का आरोप
याचिका में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट वर्ष 2019 में निजी क्लीनिकों में ओपिओइड दवाओं के वितरण पर रोक लगा चुका है। नए नियम उस अंतरिम आदेश को अप्रभावी करने जैसे प्रतीत होते हैं। साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों के पंजीकरण और निगरानी का अधिकार स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी को है, जिसे इन नियमों से दरकिनार किया जा रहा है।हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।