प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और पूर्व सांसद संजय भाटिया के नाम की चर्चा
पूर्व मंत्री बनवारी लाल भी दौड़ में, कुलदीप बिश्नोई भी कर रहे हैं प्रयास
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राज्यसभा सीट के उपचुनाव के लिए भाजपा सोमवार को उम्मीदवार के नाम पर मोहर लगा सकती है। नामांकन की अंतिम तारीख के लिए बस दो दिन बचे हैं। बताया जा रहा है कि पानीपत में पीएम के कार्यक्रम के बाद पार्टी की ओर से उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी जाएगी। राज्यसभा के लिए कई दावेदारों के नाम पर चर्चा है। इनमें करनाल के पूर्व सांसद संजय भाटिया और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली प्रमुख दावेदार हैं। दलित चेहरे के तौर पर पूर्व मंत्री डॉ. बनवारी लाल की भी चर्चा है।
पूर्व सांसद संजय भाटिया पूर्व सीएम मनोहर लाल के करीबी हैं। संगठन में उनकी पकड़ मजबूत है और संघ से भी रिश्ते अच्छे हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने उनकी टिकट काट मनोहर लाल को उम्मीदवार बनाया था। मनोहर लाल ने करनाल सीट से अच्छी अंतर से जीत दर्ज की। संजय भाटिया विधानसभा जाना चाहते थे। मगर पार्टी ने उन्हें इंतजार करने को कहा। विधानसभा चुनाव में संजय भाटिया को पीएम की रैलियों की जिम्मेदारी दी गई, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। विधानसभा चुनाव में पंजाबी समुदाय के 11 में से आठ विधायक चुनकर आए हैं। विधानसभा चुनाव में मिले समर्थन के आधार पर पार्टी यदि किसी पंजाबी उम्मीदवार के नाम पर मुहर लगाती है तो संजय भाटिया पहले नंबर पर हैं।
दूसरे दावेदार ब्राह्मण समाज से आने वाले पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी ने हैट्रिक जमाते हुए जबरदस्त वापसी की है। विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण समाज के 11 में से सात विधायक जीतकर आए। बड़ौली ने संगठन का सरकार के साथ अच्छा तालमेल बैठाया हुआ है। हाल ही में सदस्यता अभियान में भी भाजपा ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। अब तक करीब 30 लाख सदस्य बनाए जा चुके हैं। केंद्रीय नेतृत्व भी हरियाणा भाजपा की सदस्यता अभियान की तारीफ कर चुका है। ऐसे में बड़ौली का भी पलड़ा भारी है।
पार्टी यदि इन दोनों में से किसी पर मुहर नहीं लगाती है तो फिर दलित चेहरे पर दांव खेल सकती है। दलित चेहरे के तौर पर पार्टी के अंदर पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल और पूर्व मंत्री डॉ. बनवारी लाल का नाम चर्चा में हैं। हालांकि पार्टी ने लोकसभा चुनाव में सुनीता दुग्गल का टिकट काट विधानसभा चुनाव में मौका दिया, मगर वह चुनाव हार गई। साफ छवि वाले पूर्व मंत्री बनवारी लाल के नाम की भी चर्चा है। वह भी मनोहर लाल के करीबी हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। ऐसे में पार्टी यदि दलित चेहरे के तौर पर किसी को चुनती है तो बनवारी लाल उसमें फिट बैठते हैं। हालांकि पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई भी राज्यसभा पहुंचने के लिए काफी प्रयास कर रहे हैं।
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भाजपा का चुनाव जीतना तय
राज्यसभा का उपचुनाव जीतने के लिए भाजपा के पास पर्याप्त नंबर मौजूद हैं। राज्य में उसके पास 48 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। कांग्रेस ने उम्मीदवार उतारने से मना कर दिया है। ऐसे में पार्टी के उम्मीदवार का राज्यसभा में पहुंचना तय है। अब सिर्फ उम्मीदवार के नाम पर मुहर लगना बाकी है।