चार फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में इस बार लोग यह नहीं कह पाएंगे कि ईवीएम से छेड़छाड़ हुई थी। उन्होंने किसी और उम्मीदवार को वोट डाला था, उनका वोट दूसरे उम्मीदवार को चल गया।
निर्वाचन आयोग ने इस समस्या का तोड़ निकाल दिया है। एटीएम की तर्ज पर लोग इस बार ईवीएम का बटन दबाने के बाद देख पाएंगे कि उनका वोट उम्मीदवार के पक्ष में गया है नहीं।
यह चीज मतदाता सात सेकेंड तक ईवीएम से जुड़ी नई मशीन की स्क्रीन पर देख पाएंगे। इसके अलावा मतदान के बाद मशीन से एक पर्ची भी निकलेगी, जो मशीन के अंदर सील रहेगी। यह चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में रहेगी।
जानकारी के मुताबिक, निर्वाचन आयोग द्वारा ईवीएम मशीनों को आम लोगों के लिए फ्रेंडली बनाने को समय के साथ परिवर्तन किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में यह कार्रवाई की गई है।
अपराधियों पर रखी जा रही नजर
चुनाव
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अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, एक ईवीएम में करीब 1200 से 1300 लोगों के मतदान की सुविधा होती है। यह सुविधा अनुसार तय की जाती है।
वहीं, दूसरी तरफ मतदान करने में किसी को दिक्कत न आए, इसके लिए निर्वाचन कार्यालय की तरफ से लोगों को ईवीएम मशीनों के प्रयोग संबंधी भी जागरूक किया जा रहा है।
अपराधियों पर रखी जा रही नजर
इसके अलावा पुलिस द्वारा अपराधियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। वहीं, अधिक से अधिक भगोड़ों को पकड़ा जा रहा है, ताकि चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से करवाया जा सके। इतना ही नहीं, एसएसपी ने भगोड़ों को गिरफ्तार न करने पर दो एसएचओ को लाइन हाजिर कर दिया था।
स्ट्रांग रूम में रखी जाती है ईवीएम
ईवीएम को भी निर्वाचन आयोग द्वारा कड़ी सुरक्षा में रखा जाता है। ईवीएम को लोहे के संदूक में रखा जाता है। इसके बाद उसे स्ट्रांग रूम में रखते है। इस पर निर्वाचन आयोग की कड़ी नजर रहती है।