चंडीगढ़। ...आतंकियों से मुठभेड़ में सेना की टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे मेजर सुब्रह्मण्यम को गोली लग गई और मेजर मौके पर शहीद हो गए, लेकिन पूरी पलटन को मेजर की पार्थिव देह के साथ वापस बुला लिया गया। आर्मी कैंटीन में डिनर से पहले मेजर अभिमन्यु के गले यह बात नहीं उतरी कि आखिर पलटन को आगे क्यों नहीं भेजा गया और मेजर अभिमन्यु इस बात की तहकीकात शुरू कर देते हैं।
सेना में मेजर अभिमन्यु के दूसरे साथी इस बात को एक रूटीन बताते हैं कि मेजर सुबु की जगह हम से कोई और होता तो उनकी भी शहादत हो सकती थी और सभी मेजर अभिमन्यु को शांत रहने के लिए कहते हैं। लेकिन अभिमन्यु के जहन में कुछ और ही चल रहा होता है। वह एनकाउंटर की टुकड़ी में शामिल एक सैनिक से सख्ती से पूछताछ करते हैं तो वह टूट जाता है और कबूल करता है कि मेजर सुबू उसे छुट्टी नहीं दे रहे थे, इसलिए उन्होंने उन्हें गोली मार दी, लेकिन उन्हें इस बात का बेहद अफसोस है और इस कत्ल का बोझ नहीं उठाया जा रहा। मेजर सुबू की मौत का असल खुलासा तो तब होता है जब पता चलता है कि सैनिक को केवल एक टूल के रूप में इस्तेमाल किया गया जबकि अन्य अधिकारी भ्रष्टाचार में संलिप्त थे और मेजर सुब्रह्मण्यम उनके खिलाफ आवाज उठा रहे थे। लिहाजा सभी ने एक सोची समझी रणनीति के तहत मेजर को फर्जी मुठभेड़ में मार डाला। लेकिन मेजर अभिमन्यु इस वारदात को उजागर करने का प्रण लेेते हैं और शहीद मेजर सुबू की हत्या का बदला लेते हैं।
परंपरा आर्ट्स के पांच वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर में वीरवार को नाटक कोर्ट मार्शल नहीं का लोमहर्षक मंचन हुआ। कलाकारों का अभिनय देख पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। विवेक आसरी के लिखे इस नाटक में सेना व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और सैनिकों के शोषण को दिखाया गया है। नाटक में कुल आठ कलाकार हैं। एक लाइट डिजाइनर है और चार बैक स्टेज पर हैं। इसमें कश्मीर की एक आर्मी कैंटीन का सीन है। इस नाटक के लिए खासतौर पर सेना की नई वर्दी तैयार की गई। तथ्यों को प्रस्तुत करने और भावनाओं को जगाने के बीच संतुलन बनाते हुए यह नाटक कश्मीर में एक फर्जी मुठभेड़ में सेना के ही व्यक्ति द्वारा मारे गए एक सेना अधिकारी की कहानी है। पूरी कहानी एक जिज्ञासु और इमानदार युवा सैन्य अधिकारी अभिमन्यु के इर्द-गिर्द घूमती है जो इस अधिकारी की मृत्यु का वास्तविक कारण जानने और निरीक्षण करने के लिए उत्सुक है।
यह नाटक भ्रष्टाचार और झूठे आख्यानों जैसे बहुत ही महत्वपूर्ण और गंभीर सामाजिक मुद्दों पर भी केंद्रित है। समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार के साथ-साथ सेना जैसे बड़े संस्थान में भी भ्रष्ट तंत्र कैसे काम कर रहा है इस पर प्रकाश डालता है। कहानी के अंत में ईमानदार अफसर अभिमन्यु भ्रष्टाचार को खत्म करने का प्रण लेता है और दोषियों को सजा दिलवाकर मुंडकोपनिषद में दिए श्लोक सत्यमेव जयते को सार्थक सिद्ध करता है।
ये हैं नाटक के पात्र...
परंपरा आर्टस की ओर से नितिन शर्मा ने बताया कि एक घंटा 10 मिनट अवधि की इस नाटक में कुल 9 पात्र हैं। उन्होंने बताया कि अभिमन्यु का किरदार रोहित शर्मा, मेजर विक्रम का किरदार मलिक रेहान, मेजर दीपेश का किरदार अनुज चहल, कैप्टन खान का किरदार प्रतीक बूरा, बार अटेंडेंट का किरदार रॉकी मावी, हवलदार सतविंदर का किरदार कुणाल मान, सैनिक का किरदार सौरभ रावत निभाया।