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अमर उजाला वेबिनार: 'कोरोना काल में युवाओं का भविष्य' विषय पर एक्सपर्ट ने रखी अपनी राय, आप भी पढ़ें

Sun, 26 Jul 2020 03:53 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
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अमर उजाला वेबिनार - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना से युवाओं का भविष्य कितना प्रभावित हुआ है, शिक्षा और रोजगार पर क्या-क्या संकट खड़े हुए, इन समस्याओं से किन माध्यमों को अपनाकर पार पाया जा सकता है। इस संबंध में अमर उजाला पंचकूला कार्यालय मेें रविवार को एक वेबिनार का आयोजन किया गया। आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों मेेें सेवाएं दे रहे विशेषज्ञों ने सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखकर आगामी वर्षों में समाज को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, इस पर मंथन करते हुए ऑनलाइन जुड़े लोगों की जिज्ञासाओं को शांत किया।

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वेबिनार में विशेष तौर पर जिला मौलिक अधिकारी सुनीता नैन, जैनेंद्र पब्लिक स्कूल सेक्टर-1 की को-ऑर्डिनेटर कृष्णा कौशिक, सामाजिक कार्यकर्ता मनीष कुमार बांगड़, सामाजिक कार्यकर्ता भारत भूषण बंसल, एडवोकेट दिनेश जांगड़ा, एडवोकेट करूणदीप चौधरी, पूर्व मेयर रविंदर रावल, एक कदम टीचर की सुमन और आरडब्ल्यूएफ पंचकूला के पूर्व जनरल सेक्रेट्री एवं आरडब्ल्यूए के जनरल सेक्रेटरी सुभाष पपनेजा शामिल रहे।

इनके अलावा एक्सपर्ट पैनल में भी बुद्धिजीवी वर्ग से कई प्रतिष्ठित लोग ऑनलाइन जुड़े रहे। इनमें पेशे से साइकोलॉजिस्ट विनीता जोशी, सेक्टर-1 के सरकारी कॉलेज से प्रोफेसर अनिल पाण्डेय, समाज सेविका अमिता मरवाहा, साजन शर्मा समेत विभिन्न क्षेत्रों के लोग शामिल रहे। वेबिनार में सभी लोगों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, व्यापार, ऑनलाइन शिक्षा, स्कूल फीस, बच्चों व बुजुर्गों मेें तनाव और घरेलू झगड़ों समेत विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव से समस्याओं का निराकरण करना बताया। इन लोगों का कहना है कि कोरोना महामारी से लोगों की मानसिकता पर पड़े नकारात्मक प्रभाव को दूर कर उनके लिए सुखद सोच का आधार तलाशा जाए।  

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1. कृष्णा कौशिक, जैनेंद्र पब्लिक स्कूल सेक्टर-1 की को-ऑर्डिनेटर - कोरोना महामारी से कोई भी अछूता नहीं है। युवाओं की शिक्षा प्रभावित हुई है, और परीक्षा की प्रक्रियाओं में अचानक बदलाव करने पड़े हैं। युवाओं की नौकरियां जा रही हैं। रोजगार जाने और शिक्षा पर पड़े असर से कई लोग तो इतने तनावग्रस्त हो गए हैं कि जिंदगी उन्हें बोझ लगने लगी है। इन समस्याओं के समाधान के लिए बच्चों और अन्यों की काउंसिलिंग जरूरी है। सभी को यह समझना आवश्यक है कि हर व्यक्ति के जीवन मेें संघर्ष का समय कभी न कभी अवश्य आता है। चुनौतियों से भागना कोई हल नहीं है। युवाओं को धैर्य से काम लेकर परिस्थितियों के सामान्य होने का इंतजार करना चाहिए। भारत में कई ऐसे महापुरुष रहे हैं, जो संकट काल से न केवल उबरे बल्कि समाज के लिए एक उदाहरण बने हैं। नकारात्मकता में भी सकारात्मकता होती है। 

2. सुनीता नैन, डीपीसी समग्र शिक्षा पंचकूला- कोरोना महामारी के कारण शिक्षा, रोजगार और व्यापार में असुरक्षा की भावना है। ऑनलाइन शिक्षा को भी तनाव का एक कारण बताया है। यदि ऐसी शिक्षा पर ही बात करें तो सरकारी स्कूलों में अभी भी संसाधनों की कमी है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार उन्हें फोन कर बताते हैं कि वे अपने बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दिलाने में समर्थ नहीं है। वे विदेश आवाजाही करती रहती हैं। विदेशों के स्कूलों में जाकर देखा है कि बच्चों को स्किल डेवलपमेंट की शिक्षा छठी कक्षा से देनी शुरू कर दी जाती है, जो उन्हें जीवन पर्यंत आत्मनिर्भर बनाए रखती है। भारत में स्कूली शिक्षा अभी इससे काफी अलग है। भारत की शिक्षा पद्धती में स्किल डेवलपमेंट की शिक्षा पर जोर देना चाहिए। सरकार को बच्चों के पाठ्यक्रम से अनावश्यक सिलेबस हटाना चाहिए। कोरोना काल में इंटरनल असेसमेंट के अनुसार अंक दिए गए हैं। यहां तक छात्रों को समय से डिग्री भी नहीं दी गई। इस कारण छात्र समय रहते निर्धारित ही नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। कामगारों के समक्ष रोटी का संकट औद्योगिक इकाइयां बंद होना है। छात्रों और अन्यों को मोरल और बौद्धिक समर्थन देना जरूरी है। स्वयं सीखना और रचनात्मक सोच का विकास निरंतर करते रहना चाहिए। 

3. दिनेश कुमार जांगड़ा एडवोकेट - वर्ष 2009 में बेरोजगारी दर 23 प्रतिशत थी और अब यह दर बढ़कर करीब पचास प्रतिशत हो चुकी है। देश की शक्ति युवा है, रोजगार का जाना एक चिंता का विषय है। हालांकि कोरोना महामारी के दौरान पारिवारिक दृष्टिकोण से सकारात्मक पहलू भी सामने आती है। पहले लोग परिवार के सदस्यों को अधिक समय नहीं दे पाते थे लेकिन अब वे उनके साथ हैं। फिजुलखर्च करने वाले युवाओं को पैसे की कीमत पता लगी है।

लोग स्वास्थ्य के प्रति सजग हुए हैं। हालांकि कोरोना महामारी से खिलाड़ियों को अधिक नुकसान हुआ है। खिलाड़ी समय से अभ्यास नहीं कर पा रहे हैं। सरकार खिलाड़ियों समेत अन्य सभी क्षेत्रों के कामगारों को विशेष छूट देकर उन्हें दोबारा काम पर लेने का प्रबंध करे। कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित वकालत का पेशा हुआ है। वकीलों की दो श्रेणियां हैं। पहली श्रेणी में वे हैं जो किसी वरिष्ठ वकील के साथ प्रैक्टिस कर रहे हैं, दूसरे वे लोग जो लॉ के फाइनल वर्ष के छात्र हैं।

वरिष्ठ वकीलों से जूनियर वकीलों को वेतन, पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। इस पेशे के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वकालत के अलावा वकील जीवनयापन के लिए किसी प्रकार का कोई अन्य कार्य नहीं कर पाते। क्योंकि यदि वह ऐसा करते हैं तो उनका वकालत का लाइसेंस निरस्त कर दिया जाता है। ऐसे में वे अपना जीवनयापन केवल वकालत से ही कर पाते हैं। लेकिन कोरोना महामारी के चलते कोर्ट में केवल स्टे और जमानत के आवश्यक केस ही लग रहे हैं। जबकि सामान्य परिस्थितियों में रोजाना एक हजार से बारह सौ केस लगते थे। ऐसे में सबसे अधिक संकट में वकालत का पेशा है। 

4. आरडब्ल्यूए-16 के जनरल सेक्रेट्री सुभाष पपनेजा: इस समय पूरी मनुष्यता को ही खतरा बना हुआ है। इसके लिए केवल मानव ही जिम्मेदार है। क्योंकि लोगों ने वायु, पानी और धरती का दोहन किया है। बहुत से अध्ययनों से स्पष्ट है कि यदि प्रकृति से तालमेल बैठाकर नहीं चला जाएगा तो विभिन्न प्रकार के संकट समाज-देश को देखने होंगे। इन समस्याओं के हल हम सभी को मिलकर स्वयं करने होंगे। जो लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं, उन्हें घरों में ऑफिस का माहौल नहीं मिलता। यही कारण है कि ऐसी विषम परिस्थितियों में पारिवारिक सदस्यों के विचारों में भिन्नता होती है।

सरकार को किसी न किसी स्तर पर सभी गतिविधियां शुरू करनी ही होंगी। वर्तमान में लोगों ने जीवन को स्वयं अधिक बोझिल बनाया हुआ है, जबकि ऐसा है नहीं। क्योंकि जब अपने बाल जीवन को याद करता हूं तो हर प्रकार का तनाव भूल जाता हूं। हम सभी को पर्यावरण को अपने अनुकूल बनाकर प्राकृतिक तरीके से जीवन जीने की आवश्यकता है। शिक्षा पद्धति में भी बदलाव की आवश्यकता है। संसाधनों को अपग्रेड करना होगा। स्वभाव और विचार ठीक रहेंगे तो सब कुछ ठीक होगा। वातावरण को नुकसान पहुंचाने से रूकना होगा। पहले पारिवारिक सदस्य एकसाथ बैठकर खाना खाते थे और विभिन्न विषयों पर चर्चा होती थी लेकिन अब हर कोई एकाकी जीवन जी रहा है। इससे तनाव मानव जीवन को अधिक प्रभावित करता है। 

5. रविंद्र रावल पूर्व मेयर एवं सामाजिक कार्यकर्ता- कोरोना महामारी के दौरान सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं फेल साबित हुई हैं। निजी शिक्षण संस्थान भी नाकाम साबित हुए हैं। निजी संस्थानों द्वारा बेरोजगारों से पैसे मांगे जा रहे हैं।  शैक्षणिक दृष्टिकोण से हम लोगों ने सरकारी तंत्र को स्वयं कमजोर बनाया है। क्योंकि लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों के बजाय प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना पसंद करते हैं। जबकि सरकारी स्कूल कहीं अधिक सशक्त हैं।

हम सभी लोग सरकारी स्कूलों से पढ़े हैं और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। छोटे बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा का कोई फायदा नहीं है। रोजगार जाना सरकार की नाकामी है। सरकार को छह महीने जीरो स्तर पर लाना चाहिए। सरकार को घर बैठे बेरोजगारों को आर्थिक मदद देनी चाहिए। नौकरियों के लिए नेशनल डाटाबेस तैयार करना उचित रहेगा, ताकि हर युवा यहां-वहां विचरने के बजाय एक प्लेटफॉर्म पर रोजगार तलाश सके। 

6. भारत भूषण बंसल, सामाजिक कार्यकर्ता- कोरोना महामारी के दौरान परिवार बच्चों पर अधिक नजर रख पा रहे हैं। वह देख पा रहे हैं कि उनके बच्चे मोबाइल का सदुपयोग कर रहे हैं या नहीं। उन्होंने लोगों का रोजगार जाने से अपराध बढ़ने की आशंका जताई। कहा कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों व अन्यों का टीए, डीए और अन्य भत्तों में सरकार ने कटौती तो कर दी लेकिन अपने स्तर पर किसी के लिए कुछ नहीं किया। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए हर दृष्टिकोण से संकट बना हुआ है। 

7. मनीष कुमार बांगड़: मेरे पास बीते समय की एक ऑडिट रिपोर्ट थी, जिसमें कई निजी स्कूल पचास से 70 करोड़ रुपये फायदे में थे। कोरोना महामारी के दौरान भी निजी स्कूल अभिभावकों से फीस तो वसूल रहे हैं लेकिन कई अध्यापकों के उनके पास फोन आते हैं कि उन्हें वेतन नहीं दिया जा रहा। ऐसे में अभिभावक और अध्यापक दोनों परेशान हैं। ऑनलाइन शिक्षा का दबाव कम करना होगा। जब बच्चे स्कूलों में जाते थे और अब शिक्षा ऑनलाइन ग्रहण कर रहे हैं, तो फिर अभिभावकों से फीस पूरी किसी आधार पर वसूली जा सकती है। सरकार को स्कूली फीस में छूट देने चाहिए। नौवीं कक्षा से बारहवीं कक्षा तक के छात्रों को तो ऑनलाइन शिक्षा दी जाए लेकिन छोटे बच्चों को इसका कोई फायदा नहीं है। हर किसी को एक-दूसरे का सहयोग करने की आवश्यकता है। 

8. करूणदीप चौधरी, वकील और एनजीओ संचालक:  कोरोना महामारी से बेरोजगारी तीन गुणा तक बढ़ चुकी है। यूनेस्को ने 32 करोड़ छात्रों के प्रभावित होने की बात कही है। चार श्रेणियों पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ा है। इनमें फूड कारोबार, फार्मा, ई-कॉमर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। युवाओं को स्टार्ट अप करने के लिए लोन की सुविधा दी जानी चाहिए। कम और आसान शर्तों पर यदि छात्रों, युवाओं को सरकार और बैंक लोन की सुविधा उपलब्ध कराए तो रोजगार के संकट को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

वे आगामी समय में एक पीआईएल दाखिल कर शिक्षा व्यवस्था को सुगम और आसान बनाने का प्रयास करेंगे। पहले के मुकाबले 85 घंटे की क्लास अब ऑनलाइन महज चार घंटे ही लग रही है। तो ऐसे में स्कूल एक समान फीस कैसे वसूल सकते हैं। कोर्ट बंद होने से केस फाइल होने कम हो गए हैं। अत्यावश्यक मामलों के अलावा अन्य केसों की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भी नहीं हो रही है। अब डिजिटल इंडिया कहां खो गया है। केसों की सुनवाई और फाइलिंग की सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाने की जरूरत है। 

9. सुमन, एक कदम की शिक्षिका : सरकार को सोशल डिस्टेंस रखकर बच्चों को योग की शिक्षा भी देनी चाहिए। इससे बच्चों व अन्य चंद सेकंड और मिनटों में ही तनाव मुक्त हो सकेंगे। हर आधे घंटे और चालीस मिनट बाद योग क्रियाएं कराई जानी चाहिए। बाल आसन तनाव का स्तर शून्य कर देता है। इस दिशा में अध्यापकों और अभिभावकों को एकसाथ प्रयासरत रहना होगा। सुमन ने कहा कि उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान सामान्य परिस्थितियों के मुकाबले कहीं अधिक बढ़ चढ़कर काम किया है और सर्वे कर उन 63 बच्चों को स्कूल तक लाए, जो शिक्षा से दूरी बनाए हुए थे। 

सवाल और विशेषज्ञों के जवाब: 
सवाल : नौकरी जाने और शिक्षा पद्धति सही नहीं होने से प्रभावित छात्र क्या करें ? 
एक्सपर्ट: पारिवारिक सदस्य और अच्छे दोस्त उनके साथ समय बिताकर उन्हें उन लोगों की याद दिलाएं, जिन्होंने संकट से स्वयं को निकालकर सफलता हासिल की है। अभिभावकों को छात्रों की शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। 

सवाल: शिक्षा ऑनलाइन दी जा रही है, क्या इससे इससे तनाव बढ़ रहा है ?  
एक्सपर्ट: छात्रों व अन्यों को स्क्रीन टाइम मैैनेजमेंट सिखाएं। व्यू नॉर्मल रखें और धैर्य से काम लें। पारिवारिक सदस्य उन्हें अच्छा माहौल प्रदान करें। इससे छात्र तनाव मुक्त रहेंगे।  

सवाल: युवा अपने भविष्य को कैसे संवार सकते हैं और चुनौतियों से पार पाने के लिए क्या किया जाए ?  
एक्सपर्ट: कोई भी निर्णय सरकार को लेना है, क्योंकि जनता को फैसला का अधिकार नहीं है। जैसे कि परीक्षा कब और किस माध्यम से ली जानी है, यह सरकार के फैसले पर निर्भर करता है। युवा वर्तमान समय में तकनीकी दक्षता में निपुण हो सकते हैं और पसंदीदा विषयों का गहन अध्ययन कर स्वयं को मजबूत बना सकते हैं। 
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सवाल: नौकरी पाने के लिए क्या किया जाए ? 
एक्सपर्ट: सरकार को जिन जिन जगहों पर रिक्त पद हैं, उनका डाटा मंगाकर प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करानी चाहिए। नौकरियों के लिए ऑनलाइन आवेदन अभी मंगाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। परिस्थितियां सामान्य होने पर परीक्षाएं आयोजित कराई जाएं तो युवा वर्ग उत्साहित होगा और समय भी बचेगा। 

सवाल: लोगों का रोजगार जा रहा है, क्या करें ?  
एक्सपर्ट: सरकार एक ऐसी पॉलिसी बनाए कि उद्योग, इंडस्ट्री और अन्य संस्थाएं कर्मचारियों को निकाल नहीं सके । भले ही उनके वेतन में कटौती करनी पड़े लेकिन किसी की नौकरी के लिए संकट न खड़ा हो।  

सवाल: बंद पड़े उद्योगों केे उद्धार के लिए क्या करें ? 
एक्सपर्ट: छोटी-छोटी इकाइयों और कुछ बड़ी इकाइयों को सरकार उनकी क्षमता के अनुसार लोन प्रदान करे। लोन मिलने से कारोबारी राहत महसूस करेंगे और लोगों को भी रोजगार मिलेगा। 

सवाल: स्वास्थ्य के दृष्टिकोण के मद्देनजर सरकार क्या करे ? 
एक्सपर्ट: सरकार को व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग करानी चाहिए। ताकि स्वस्थ और अस्वस्थ लोगों का अंतर पता लगे। जिन लोगों का स्वास्थ्य ठीक है, उन्हें कुछ हद तक छूट प्रदान की जाए। कुछ देशों ने कोरोना महामारी के दौरान तेजी से टेस्टिंग की। इससे बीमार और स्वस्थ लोगों का पता लग सका और आगे की रणनीति आसानी से तय की जा सकी। 

सवाल: गरीब लोग ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण करने के लिए क्या करें ?  
एक्सपर्ट:  सरकार को आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को इंटरनेट की सुविधा और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए। ताकि कोई शिक्षा से वंचित नहीं रहे। 

सवाल: वर्क फ्रॉम होम का प्लेटफॉर्म कितना उपयोगी है ? 
एक्सपर्ट: यह एक अवसर के तौर पर सामने आया है। विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के लिए यह एक विकल्प है, जिसकी मदद से सभी व्यापारी और बड़ी इंडस्ट्री कर्मचारियों से घर बैठाकर कम वेतन पर भी काम ले सकती हैं। यह एक नवीन तरीका मिला है। 

सवाल: गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चों और गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों के लिए क्या कोई सुरक्षित विकल्प मौजूद हैं ? 
एक्सपर्ट: बड़े स्वास्थ्य संस्थानों से मरीजों को समय पर डॉक्टरी परामर्श नहीं मिल पा रहा है। मरीजों को ओपीडी तक की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। सरकार को मरीजों के इलाज के लिए तेजी से काम करने की आवश्यकता है। प्राइवेट अस्पताल सरकारी गाइड लाइन की बाध्यता के कारण कई प्रकार के टेस्ट नहीं कर पा रहे हैं। मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए सरकार को कुछ टेस्ट और समय रहते इलाज की सुविधा जल्द प्रदान करने की व्यवस्था करनी चाहिए।
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