गांव चांदी वाला के किसान तरसेम सिंह व दर्शन सिंह ने बताया कि चांदी वाला की कुछ जमीन बहुत नीचे है। इस कारण दरिया का पानी भर जाता है। दरिया पार बसे गांव के ग्रामीणों की नींद उड़ी हुई है, क्योंकि दरिया में बाढ़ आती है तो दरिया के आसपास बसे सभी गांवों को नुकसान पहुंचेगा। वर्ष 1988 में बाढ़ के कारण सीमांत गांवों का बहुत नुकसान हुआ था।
दरिया में जलस्तर बढ़ने से कई बार दरिया पार गांवों की फसल के अलावा उन्हें नुकसान पहुंचा है, क्योंकि अधिकतर गांव दरिया की जमीन पर बसे हैं। फिलहाल प्रशासन ने भी बाढ़ से निपटने के लिए पूरे प्रबंध किए हुए हैं। सीमांत गट्टी राजोके स्थित सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल डा. सतिंदर सिंह ने बताया कि गांव कालू वाला से किश्ती के जरिए दरिया पार कर बच्चे स्कूल में पढ़ने आ रहे हैं।
दरिया का पानी उफान पर है। उनके स्कूल में नौवीं, 10वीं व 12वीं के बच्चे गांव कालू वाला से आते हैं। किश्ती पर दरिया पार करने में बहुत खतरा होता है।