फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Punjab Water Dispute: पानी की पिच पर सीएम मान का सियासी सिक्सर, जल विवाद पर स्टैंड लेकर किसानों को जताया भरोसा

Tue, 06 May 2025 12:07 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

CM Bhagwant Mann News: पंजाब-हरियाणा के बीच उपजे जल विवाद पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पानी की पिच पर सियासी सिक्सर लगाया है। जल विवाद पर स्टैंड लेकर सीएम मान ने किसानों का भरोसा भी जीतने का प्रयास किया है। 
विज्ञापन
सीएम भगवंत मान - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Punjab Haryana Water Row: पंजाब-हरियाणा के बीच उपजे जल विवाद पर सीएम भगवंत मान ने सख्त रुख अख्तियार कर रखा है। सीएम मान का स्टैंड क्लीयर है कि वह पंजाब के हितों का हनन नहीं होने देंगे। पंजाब के पानी को हरियाणा को ही नही, बल्कि किसी अन्य राज्य को भी नहीं देने देंगे।
विज्ञापन


सियासी माहिरों की मानें तो सीएम मान ने पानी की पिच पर सियासी सिक्सर लगाया है। पिछले 13 दिनों से हरियाणा को अतिरिक्त पानी दिए जाने को लेकर सियासी उबाल देखने को मिल रहा है। इस कदम के साथ सीएम मान ने किसानों का भरोसा भी जीतने का प्रयास किया है। 

दरअसल सीएम मान ने यह कदम उठाते हुए स्पष्ट किया है कि वह राज्य सरकार के पंजाब के हर किसान के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए शुरू की नहरी पानी योजना को सिरे चढ़ाने के लिए कुछ भी करेंगे। दरअसल पंजाब के 117 ब्लॉक डार्क जोन में है, जहां भू जल स्तर बेहद ही नीचे गिर गया है।
विज्ञापन


देश के अनाज भंडार में गेहूं और चावल देता है पंजाब
देश के अनाज भंडार में पंजाब हर साल लाखों मीट्रिक टन गेहूं और चावल केंद्र को देता है। सीएम मान ने विधानसभा में तर्क देते हुए कहा कि पंजाब को हरित क्रांति का नुकसान हुआ। हरित क्रांति से पंजाब देश का पेट तो भरता रहा, लेकिन अपना पानी खत्म करता रहा। सीएम ने कहा कि पंजाब 185 लाख मीट्रिक टन चावल केंद्र को देता है। 

चावल उनकी खेती नहीं है। बदले में पंजाब के हकों को खत्म किया जा रहा है। सीएम ने कहा नौ गोबिंद सागर झील जितना पानी हर साल चावल की खेती में लगता है। उन्होंने कहा कि पंजाब आज तक 5.3 प्रतिशत यानी 16 से 17 हजार क्यूसेक पानी का अधिक इस्तेमाल कर चुका है।

 

पाकिस्तान का पानी हमें दो, हम हरियाणा को दे देंगे
सीएम ने कहा पाकिस्तान से समझौता रद्द करने की बात की जा रही है। सीएम ने कहा कि सिंधु जल समझौते का पानी पंजाब के पौंग और रणजीत सागर डैम में दे दिया जाए। वह भाखड़ा डैम से हरियाणा, राजस्थान और बाकी राज्यों को पानी दे देंगे। सीएम ने कहा कि झारखंड के पास कोयला है। वहां से सीधा कोयला नहीं ला सकते हैं। 

 

केंद्र कहता है मुद्रा पोर्ट से लेकर आओ, जब हमने गेहूं और अन्य चीजों की दुहाई दी तो पीछे हटे। इतना ही नहीं जब पठानकोट एयरबेस पर हमला हुआ तो केंद्र सरकार ने खर्च पंजाब पर डाल दिया। इसके बाद वह रक्षा मंत्री से मिले तो वह माफ हुआ है। इनका बस चले तो राष्ट्रगान से पंजाब खत्म कर देंगे। उसमें यूपी जोड़ देंगे।

केंद्र में भाजपा हो या कांग्रेस, पंजाब के साथ हमेशा विश्वासघात हुआ-अमन अरोड़ा
पंजाब-हरियाणा जल विवाद पर पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाब को 1955 से योजनाबद्ध ढंग से अपने जल संसाधनों से वंचित रखा जा रहा है। इस के बाद 1960 में इंडस जल संधि से पंजाब के 80 प्रतिशत नदी जल को पाकिस्तान की ओर मोड़ दिया। मंत्री अरोड़ा ने बताया कि कैसे बाद के समझौतों - जैसे कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम (1966), त्रिपक्षीय समझौता (1981), और मनमाने ढंग से पानी के मूल्यांकन- ने पंजाब को उसके आधिकारिक हिस्से से भी वंचित कर दिया। 

अरोड़ा ने कहा कि पंजाब के साथ बार-बार धोखा किया गया है, चाहे केंद्र में कांग्रेस की सरकार हो या भाजपा की। उन्होंने हमेशा पंजाब के साथ सौतेला व्यवहार किया है, वह पंजाब का पानी और अनाज लेते रहे पर बदले में कुछ नहीं दिया। 
विज्ञापन

बीबीएमबी बना केंद्र सरकार की कठपुतली: गोयल
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में राज्य के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बीबीएमबी के हरियाणा को अतिरिक्त पानी दिए जाने और डैम सेफ्टी एक्ट-2021 को रद्द करने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मंत्री गोयल, आप के मंत्रियों और विधायकों ने कांग्रेस को भी जमकर घेरा। गोयल ने कहा कि 1981 में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने पंजाब के पूर्व सीएम दरबारा सिंह को दिल्ली बुलाकर जल बंटवारे पर जबरन हस्ताक्षर कराए थे। 1981 में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में तीनों जगह कांग्रेस की सरकार थी। पंजाब के पानी के हितों का हनन करने का यह बड़ा कदम था। गोयल ने कहा कि बीबीएमबी सिर्फ केंद्र सरकार की कठपुतली बनकर रह गया है। पंजाब के हितों की रक्षा के लिए इसका पुनर्गठन किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें