प्रशासन ने सेक्टर-48, 49, 50 और 51 की ऐसी निजी सोसाइटियों में रहने वाले सैकड़ों लोगों को राहत दी है, जिन्होंने अभी तक प्रशासन ने कार्य पूर्ति प्रमाणपत्र नहीं लिया है।
प्रशासन ने वीरवार को यह निर्णय लिया कि जिन निजी सोसाइटियों को कार्य पूर्ति प्रमाणपत्र न लेने के कारण पानी का बिल कामर्शियल आ रहा है, उन्हें एक साल तक अब डोमेस्टिक रेट पर पानी का बिल आएगा। यह एक साल का समय ऐसी सोसाइटियों को प्रमाणपत्र लेने के लिए दिया गया है।
मालूम हो कि इस समय करीब 50 ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियां हैं, जिन्होंने निर्माण पूरा होने के बावजूद कार्य पूर्ति प्रमाणपत्र प्रशासन से नहीं लिया है। प्रशासन के अनुसार यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
दक्षिणी सेक्टरों में करीब 120 निजी सोसाइटियां हैं। लंबे समय से लोग कामर्शियल रेट की जगह डोमेस्टिक रेट पर पानी का बिल लेने की मांग कर रहे हैं।
बार-बार आपत्ति लगा देता है प्रशासन
सेक्टर-50 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रदीप भारद्वाज का कहना है कि कई सोसाइटियों ने प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया हुआ है, लेकिन प्रशासन की ओर से बार-बार नई आपत्तियां लगा दी जाती हैं।
उनका कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि ऐसी निजी सोसाइटियों के लिए संपदा विभाग एक जनता दरबार लगाए, जहां पर सभी अधिकारियों को बुलाकर उनके काम निपटाए जाएं। उनका कहना है कि प्रमाण पत्र जारी न होने के कारण लोगों से तीन गुना पानी के बिल वसूले जा रहे हैं।