जींद विधानसभा सीट पर डॉ. हरिचंढ मिड्ढा 2009 से लगातार जीत रहे थे। इससे पहले मांगे राम गुप्ता विधायक रहे। गठबंधन के समय भाजपा ने यह सीट जीती थी। अकेले अपने दम पर भाजपा इस सीट पर कभी जीत दर्ज नहीं कर पाई। 2014 के चुनाव में भाजपा के सुरेंद्र बरवाला ने इनेलो उम्मीदवार मिड्ढा को कड़ी टक्कर दी थी, लेकिन वह 2200 वोट से चुनाव हार गए।
मिड्ढा की मौत के बाद उनके सुपुत्र कृष्ण मिड्ढा इनेलो छोड़ भाजपा का दामन थाम चुके हैं। इसलिए इनेलो को नए चेहरे पर दांव खेलना होगा। इस सीट को इनेलो का गढ़ माना जाता है। जिसे बचाने की चुनौती अब नेता प्रतिपक्ष और इनेलो नेता अभय चौटाला के सामने आ गई है। कृष्ण के भाजपा ज्वॉइन करने के बाद पार्टी के लिए दुविधा की स्थिति है। अब देखना यह होगा कि वह कृष्ण मिड्ढा को टिकट देती है या फिर सुरेंद्र बरवाला को मैदान में उतारती है।
कांग्रेस के लिए आसान नहीं राह, जजपा की अग्निपरीक्षा
जींद उपचुनाव को जीतकर कांग्रेस चुनावी माहौल बनाना चाहेगी। वहीं, इनेलो और भाजपा को हराकर आगामी विधानसभा चुनाव में जीत की नींव रखने की कोशिश करेगी। मगर, गुटबाजी के चलते कांग्रेस की राह आसान नहीं है। हुड्डा व तंवर गुट प्रत्याशी के चयन को लेकर आमने-सामने हुए और भितरघात की स्थिति बनी तो हार निश्चित है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर पहले ही कह चुके हैं कि उपचुनाव की घोषणा होने के तुरंत बाद प्रत्याशी घोषित कर देंगे। उधर, यह उपचुनाव नई नवेली जननायक जनता पार्टी के लिए भी अग्निपरीक्षा होगा। पार्टी प्रदेश में पहली बार किसी चुनाव में उतरेगी। इससे अजय चौटाला, दुष्यंत और नैना चौटाला का जमीनी जनाधार भी सामने आ जाएगा।