हरियाणा में लॉकडाउन के दौरान हुए शराब घोटाले में अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। एसईटी की रिपोर्ट के बाद गृह मंत्री अनिल विज ने प्रेस कान्फ्रेंस कर रिपोर्ट विजिलेंस के पास एफआईआर दर्ज कर जांच करने के लिए भेजी थी, लेकिन वीरवार को अधिकारियों के साथ हुई बैठक में यह जानकारी मिली कि अभी तक इस मामले में एफआईआर ही दर्ज नहीं हुई।
ऐसे में बगैर एफआईआर के जांच कैसे हो सकती है। जिसके बाद शुक्रवार को फिर से गृह मंत्री अनिल विज ने गृह विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज करवा कर जांच शुरू करवाई जाए। पत्र लिखना इसलिए भी जरूरी था कि विजिलेंस गृह विभाग के अधीन नहीं है। शराब घोटाले को लेकर शुरुआत से मामला ढीला चल रहा है।
पहले इस मामले में एसआईटी और एसईटी के गठन पर मामला उलझा रहा। जिसके बाद एसईटी का गठन हुआ, लेेकिन एसईटी को शक्तियां नहीं मिली। एसईटी को शक्तियों के लिए पत्र लिखा तो फाइल कानूनी पचड़ो में ही उलझी रही। अंतत: एसईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट गृह मंत्री को सौंपी।
जांच रिपोर्ट में आईएएस शेखर विद्यार्थी और आईपीएस प्रतीक्षा गोदारा की भूमिका पर सवाल खड़े हुए। जिसके बाद विज ने इस मामले में विजिलेंस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने के लिए कहा था।
अंबाला में सक्रिय माइनिंग माफिया अब सरकारी सिस्टम पर ही हावी होने लगा है।
अंबाला छावनी से विधायक और गृह मंत्री अनिल विज ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने इस मामले में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ढिल्लो को कार्रवाई करने के लिए कहा है। ढिल्लो वर्तमान में खनन विभाग में ही तैनात हैं।