चंडीगढ़। वर्ष 2011 में यूटी पुलिस में पानी पिलाने वालों की भर्ती में धांधली के मामले में पूर्व डीएसपी जगबीर सिंह ने बीते बुधवार को जिला अदालत में जमानत याचिका दायर की थी। इस पर अदालत ने यूटी विजिलेंस से जवाब मांगा था।
विजिलेंस ने अपना जवाब दाखिल कर कहा है कि जगबीर सिंह जांच में शामिल हो गए थे और पूरा सहयोग किया। उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया क्योंकि कस्टडी में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं पड़ी। ऐसे में बिना गिरफ्तारी उनके खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी। अब डीएसपी की जमानत याचिका पर बहस 25 जुलाई को होगी। विजिलेंस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में वर्ष 2016 में पू्र्व डीएसपी जगबीर सिंह, पूर्व डीआईजी आरएस घुम्मन और इंस्पेक्टर नसीब सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया था। डीआईजी घुम्मन की मौत हो चुकी है।
वर्ष 2011 में आईआरबी (भारतीय रिजर्व बटालियन) में 64 ग्रुप डी कर्मचारियों की भर्तियां हुईं थीं। इनमें 11 पानी पिलाने वाले भी शामिल थे। जांच में कमेटी ने पाया था कि भर्ती हुए 11 पानी पिलाने वाले कर्मचारियों की मार्कशीट के साथ छेड़छाड़ हुई थी। बाद में विभाग ने वर्ष 2014 में ये भर्तियां रद्द कर भर्ती प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की गई थी। वर्ष 2015 में कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि कुछ उम्मीदवारों ने टेस्ट पास नहीं किया था जबकि उनके अंक बढ़ा दिए गए थे। दो उम्मीदवार बिना लिखित परीक्षा के ही चयनित हुए थे। वहीं, करीब 70 के करीब जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की थी लेकिन उनको इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया। इसके साथ दस उम्मीदवारों के अंकों में छेड़छाड़ हुई ताकि उन्हें इंटरव्यू के लिए योग्य ठहराया जा सके। इसके साथ नौ उम्मीदवारों के अंक बढ़ाए गए थे। भर्ती प्रक्रिया में खामियों की शिकायत मिलने के आधार पर विभाग की तरफ से इस भर्ती प्रक्रिया में धांधली की जांच के लिए एक जांच कमेटी का गठन किया गया था। रिपोर्ट मई 2016 में मुख्य विजिलेंस अफसर को सौंपी गई थी ताकि जांच हो सके। विजिलेंस ने अपनी सिफारिश में संबंधित पदों की चयन कमेटी सदस्यों पर केस दर्ज करने की सिफारिश की थी, जिसके बाद तीनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।