चंडीगढ़। ईडब्ल्यूएस कोटे के छात्रों की पढ़ाई के लिए भारतीय विद्या भवन की ओर से मांगे गए ढाई करोड़ रुपये के जवाब में यूटी प्रशासन ने हाईकोर्ट को बताया कि केवल 29 लाख रुपये ही लंबित हैं। प्रशासन ने कहा कि स्कूल ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत 25 प्रतिशत छात्रों की पढ़ाई के लिए भुगतान मांग रहा है जबकि असल में वह केवल 10 प्रतिशत के लिए ही हकदार है। यूटी प्रशासन द्वारा सौंपे गए हलफनामे पर जवाब के लिए स्कूल की ओर से समय मांगा गया। इसे मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने सुनवाई 14 जनवरी तक स्थगित कर दी।
अदालत में अर्जी दाखिल करते हुए भारतीय विद्या भवन ने बताया था कि इस सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है और यूटी प्रशासन उन पर ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत प्रवेश के लिए दबाव बना रहा है। याची ने बताया कि 2011 से उन्हें अब तक इस कोटे के तहत होने वाले एडमिशन के लिए भुगतान नहीं किया गया है। इसको लेकर याचिका लंबित है। बावजूद इसके भुगतान नहीं किया जा रहा है जबकि राशि ढाई करोड़ तक पहुंच चुकी है।
इस पर प्रशासन की ओर से कहा गया कि लंबित राशि केवल 29 लाख रुपये की है और जल्द ही इसका भुगतान कर दिया जाएगा। स्कूल की ओर से कहा गया कि 29 लाख रुपये एक सत्र में छात्रों के प्रवेश के बनते हैं और हर वर्ष यह छात्र अगली कक्षा में जाते हैं और इनकी जगह फिर इस कोटे के छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। यह प्रक्रिया निरंतर चलती है और हर वर्ष छात्रों की संख्या बढ़ती है।
इस दलील का प्रशासन के पास जवाब न होने की वजह से हाईकोर्ट ने प्रशासन को 16 दिसंबर तक की मोहलत देते हुए 29 लाख की राशि को उचित साबित करने को कहा था। साथ ही कहा था कि ऐसा न करने पर ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत इस सत्र में प्रवेश पर रोक लगा दी जाएगी। बुधवार को प्रशासन की ओर से बताया गया कि स्कूल को भूमि बेहद सस्ते दाम पर दी गई थी और शर्त के अनुसार उन्हें 15 प्रतिशत सीटों पर आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों को सरकारी स्कूल के बराबर फीस पर दाखिल करना था। नीति के तहत अभी 25 प्रतिशत आर्थिक पिछड़े वर्ग के बच्चों को स्कूल में प्रवेश देना अनिवार्य है। ऐसे में प्रशासन केवल 10 प्रतिशत बच्चों की पढ़ाई के लिए भुगतान करेगा क्योंकि 15 प्रतिशत भूमि आवंटन की शर्त में आ जाता है। प्रशासन के इस जवाब पर अपना पक्ष रखने के लिए स्कूल ने अब समय मांग लिया है।