चंडीगढ़ सिटी ‘ब्यूटीफुल’ है क्योंकि यहां के लोग हैं ‘ड्यूटीफुल’ हैं। यहां के लोग ‘ड्यूटीफुल’ हैं तो यह शहर जल्द ही ‘मल्टीफुल’ बनेगा। शहर की खूबसूरती को देखकर यह शब्द बुधवार को उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहे। उप राष्ट्रपति बुधवार को पंजाब यूनिवर्सिटी के लॉ ऑडिटोरियम में पूर्व गवर्नर बलरामजी दास टंडन की पहली पुण्य तिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उप राष्ट्रपति ने आह्वान किया कि स्वतंत्रता दिवस पर देश को जातीय, लैंगिक भेदभाव, गरीबी और अशिक्षा से मुक्त करने के लिए साझा प्रयास करने का संकल्प लें।
उप राष्ट्रपति ने बलरामजी दास टंडन को याद करते हुए कहा कि लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने नि:स्वार्थ राष्ट्र सेवा, निष्ठापूर्ण समाज सेवा के प्रमाणिक मानदंड स्थापित किए, जो जनप्रतिनिधियों की वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। जनता अपेक्षा करती है कि हम उन मानदंडों का अनुसरण करें जो टंडन जैसे नेताओं ने सार्वजनिक जीवन में स्थापित किए। उन्होंने आग्रह किया कि राजनीतिक दल अपने सदस्यों और विधायकों के लिए आचार संहिता बनाएं और उन्हें अपने घोषणा पत्र में शामिल करें।
अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने पर उन्होंने कहा कि यह समय की जरूरत थी। देशभर के लोग सरकार के इस फैसले से खुश हैं, लेकिन कुछ लोग हैं, जो देश में हो रहे विकास को पचा नहीं पा रहे हैं। न्यायिक व्यवस्था पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि अदालतों में साल तक केस पेंडिंग रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट में तारीखों पर दूर-दराज से लोग दिल्ली पहुंचते हैं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच का विस्तार कर और अलग क्षेत्रों के लिए सुप्रीमकोर्ट की अलग पीठ स्थापित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि देश में न्याय को जनता के लिए सुलभ बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की और पीठ स्थापित की जाए। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर, केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन, पंजाब और हरियाणा सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों और पंजाब यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. राजकुमार सहित अन्य उपस्थित रहे।
पंडित नेहरू ने खुद कहा था अनुच्छेद 370 अस्थाई प्रावधान : नायडू
नायडू ने कहा कि अनुच्छेद 370 केवल एक अस्थायी प्रावधान था। संसद में पंडित नेहरू के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि 27 नवंबर 1963 को अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के मुद्दे पर जवाब देते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने स्वयं कहा था कि अनुच्छेद 370 महज एक अस्थाई प्रावधान है। वह संविधान का स्थायी भाग नहीं है।
नायडू ने उस समय के राष्ट्रीय समाचार पत्रों में इस विषय पर छपी खबरों को भी पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने का देशभर में स्वागत हुआ है। उन्होंने कहा कि यह मसला देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा का है लेकिन पश्चिमी मीडिया का एक वर्ग इस विषय में भारत विरोध भ्रामक प्रचार फैला रहा है।
महामहिम कहने पर टोका, बोले-सिर्फ आदरणीय कहें
मंच पर बुलाने के लिए जब वेंकैया नायडू को महामहीम कर कर संबोधन किया गया तो उन्होंने टोकते हुए कहा कि धीरे-धीरे महामहीम बोलना छोड़ देना है, किसी को आदर देने के लिए सिर्फ आदरणीय बोलना चाहिए। यह ब्रिटिश लोगों की पद्धति है। संसद की कार्रवाई में भी हम धीरे-धीरे कई परिवर्तन कर रहे हैं। यह भी बंद हो जाना चाहिए।
मोबाइल चलाते देखा तो बीच में रोका भाषण, कहा-सुन लें थोड़ी देर में कुछ होगा नहीं
लेक्चर देते वक्त जब वेंकैया नायडू ने कुछ लोगों को आपस में बात करते और मोबाइल चलाते देखा तो बीच में बीच में कहा कि मोबाइल चलाना बंद कर दें। कहा कि कुछ लोगों की यह समस्या है कि उन्हें मोबाइल ऑन करना तो आता है, लेकिन उसे ऑफ करना मालूम नहीं है। सभा में मोबाइल को बाहर ही बंद करके आना चाहिए। वह चिंता न करें, सब शांति रहेगा। कुछ नहीं होगा।
कैप्टन अमरिंदर सिंह की तारीफ की
उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर का एक बयान पढ़कर काफी प्रसन्नता हुई। कैप्टन ने कहा है कि देश एक है, हम सब तैयार हैं किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए। वेंकैया नायडू ने कहा कि यह वक्त ऐसा है, जब सभी देश के लिए एकता दिखा रहे हैं। यह बहुत अच्छी बात है।
बलिदान की धरती है पंजाब: वेंकैया नायडू
उप राषट्रपति ने कहा कि देश का विभाजन पंजाब पर सबसे भारी पड़ा। सबसे ज्यादा नुकसान पंजाब ने झेला है। पंजाब बलिदान की धरती है। कई माताओं ने अपने संतानों को खोया। बलरामजी दास टंडन ने पंजाब में आतंकवाद के समय लोगों की सेवा की। लोगों को मुफ्त शिक्षा, चिकित्सा व भोजन मुहैया कराया। उनके घर पर हमले हुए फिर वह डरे नहीं और लोगों की सेवा की। वेंकैया नायडू ने कहा कि बीते कुछ साल में लोगों की जनप्रतिनिधियों से अपेक्षाएं बढ़ी हैं। जनप्रतिनिधियों को उन पर खरा उतरना होगा।