इस तरह करें बचाव
- संक्रमित पशु का प्रसव कराते समय विशेष सावधानी रखे। हाथों में दस्ताने पहने और आंखों पर चश्मा लगाए।
- संक्रमित पशु का दूध गर्म करके प्रयोग करें। दूध से भी संक्रमण फैलने की संभावना है।
- चिड़चिड़ापन ज्यादा होने, बुखार और जोड़ों में दर्द होने पर तुरंत चिकित्सक से सलाह करें।
- इस बीमारी में एल्कोहल का सेवन खतरनाक साबित हो सकता है।
ये है लक्षण
- पीड़ित व्यक्ति को मलेरिया बुखार की तरह सर्दी लगती है व बार-बार बुखार होता है और रात के समय ज्यादा बुखार होता है।
- पीड़ित व्यक्ति अत्यधिक चिड़चिड़ा हो जाता है और बात-बात पर झगड़ा करता है।
- शरीर के जोड़ों में दर्द और सूजन रहता है
- मनुष्य के अंडकोष में सुजन आता है।
टीबी की तरह लंबा चलता है इलाज
यह बैक्टिरियल डिजिज है और यह बैक्टिरिया कोशिका के अंदर रहता है। जब वह बाहर निकलता है तभी दवा काम करती है। ऐसे में इस बीमारी का टीबी की बीमारी की तरह लंबा इलाज चलता है।
किसी अस्पताल या लैब में में नहीं होता ब्रुसेलोसिस का टेस्ट
ब्रुसेलोसिस एक खतरनाक बीमारी है। मगर खतरनाक बात यह है कि मनुष्यों के लिए बने किसी अस्पताल या लैब में इसका टेस्ट नहीं होता। ना ही इंसानों के चिकित्सक को इस बीमारी के बारे में पता है जिससे इसके इलाज में भी कठिनाई आती है। इस बीमारी का टेस्ट सिर्फ पशु यूनिवर्सिटी हिसार लुवास में ही होता है यानी पशुओं की लैब में ही इंसानों का टेस्ट होता है। मगर कुछ पशु चिकित्सक व अन्य हिसार पशु केंद्र में अनाधिकृत तरीके से टेस्ट करवाकर बीमारी का इलाज करवा रहे है।
एक्सपर्ट व्यू
ब्रुसेलोसिस एक खतरनाक बीमारी है और बैक्टिरियल डिजिज है। यह प्रदेश में तेजी से पशुओं के साथ इंसानों में फैल रही है। जो चिकित्सक या पशुपालक ब्रुसेलोसिस बीमारी से पीड़ित पशु के संपर्क में आता है, उसमें यह बीमारी फैलने की ज्यादा संभावना रहती है। ऐसे में सावधानी रखनी चाहिए। प्रदेशभर में अनेक पशु चिकित्सक, वीएलडीए, पशु चिकित्सक इसकी चपेट में है। मनुष्य की बीमारियों की विभिन्न लैबों में इस बीमारी का पता नहीं लगता, जो ज्यादा चिंता का विषय है। डा. जयपाल सिंह, वेटनरी सर्जन