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हरियाणाः कम हुई सब्जियों की खपत, दिल्ली मंडी में फिर सप्लाई की तैयारी, नई योजना नए नियम

Wed, 20 May 2020 10:17 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

  • सब्जी उत्पादकों को संकट से उबारने की कोशिशों में जुटी सरकार
  • किसानों की सब्जियां दिल्ली मंडी बिना रुकावट पहुंचे
  • हरियाणा दिल्ली से कर रहा बातचीत
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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लॉकडाउन और संक्रमण के इस दौर में हरियाणा का सब्जी उत्पादक किसान भी आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। खेतों में सब्जियां तैयार है, लेकिन इस दौरान बाजार में अपेक्षाकृत कम हैं। सूबे की लोकल मंडियों में सब्जी उत्पादकों को उतना दाम नहीं मिल पा रहा है, जितनी उन्हें उम्मीद थी। लिहाजा, हरियाणा के सब्जी उत्पादक दिल्ली की आजादपुर मंडी की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। मगर कोरोना संक्रमण की वजह से वहां सप्लाई संभव नहीं हो पाई।
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सरकार ने अब सब्जी उत्पादकों को इस आर्थिक संकट से उबारने का जिम्मा उठाया है। सरकार द्वारा यह प्रयास किया जा रहा है कि किसानों की सब्जियों को दिल्ली की आजादपुर मंडी में बिना रुकावट भेजा जा सके। इसके लिए राज्य सरकार दिल्ली सरकार से बातचीत भी कर रही है। अभी 5 बॉर्डर मार्गो द्वारा प्रतिदिन लगभग 150 वाहनों के माध्यम से सब्जी उत्पाद का यातायात हो रहा है। सरकार इन कोशिशों में लगी है कि पहले की तरह किसानों की सब्जियां दिल्ली की आजादपुर मंडी तक पहुंचे।

हरियाणा में लगभग 3.7 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में सलाना सब्जी का उत्पादन होता है। इस समय खेतों में टमाटर, मिर्च, घीया, तोरी करेला, खीरा, शिमला मिर्च, भिंडी , बैंगन इत्यादि सब्जियों का उत्पादन जोरों पर हैं। हरियाणा के किसान अपनी इन सब्जियों को दिल्ली की आजादपुर मंडी में बेचते थे लेकिन महामारी के इस दौर में किसान ऐसा नहीं कर पा रहे हैं और लोकल मंडियों में भी  खपत कम होने की वजह से किसानों की सब्जियों के रेट बुरी तरह से पिटे हुए हैं।
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मंडियों में इससे कम रेट पर नहीं बिकेगी थोक सब्जी

मौजूदा हालातों को देखते हुए हरियाणा सरकार ने कई सब्जियों को भावांतर भरपाई योजना में शामिल कर सब्जियों का संरक्षित मूल्य निर्धारित कर दिया है। यानी मंडियों में यदि किसान की सब्जी का रेट पीटा तो सरकार तय सब्जियों को इस योजना में कवर करते हुए निर्धारित संरक्षित रेट से कम नहीं बिकने देगी।

इसके अंतर्गत आम का संरक्षित रेट 19.50 रुपए, करेले का रेट 13.50, भिंडी का रेट 10.50, मिर्च का रेट 9.50, शिमला मिर्च का रेट 9 रुपए, प्याज का रेट 6.50, टमाटर का रेट 5 रुपये, बैंगन का रेट 5 रुपये और घीया का रेट 4.50 रुपए निर्धारित किया गया है। भावांतर भरपाई योजना के अंतर्गत सब्जियों की फसल का पंजीकरण की आखिरी तिथि सरकार ने बढ़ाकर 31 मई तक कर दी है, ताकि वंचित किसानों को लाभान्वित किया जा सके। इसके लिए सरकार ने 10 करोड़ की राशि का प्रावधान किया है।

सब्जी उत्पादक खुद मार्केटिंग कर सकेंगे, लाइसेंस देगी सरकार
किसानों की मदद के लिए डायरेक्ट मार्केटिंग का भी प्रयास किया गया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल ने बताया कि सब्जियों के काश्तकारों की मदद और उन्हें आर्थिक संकट से उबारने के लिए के लिए हरियाणा सरकार हर संभव कदम उठा रही है। लगभग 110 किसान उत्पादक संघों के माध्यम से हरियाणा के विभिन्न शहरों में लाइसेंस जारी कर करीब 8 हज़ार क्विंटल प्रतिदिन सब्जी सीधे उपभोक्ता तक विक्रय की जा रही है।

इससे किसानों को सीधा लाभ पहुंच रहा है। जो भी किसान सीधे मार्केटिंग करना चाहते हैं, उनको भी लाइसेंस जारी किया जा सकता है। एसीएस संजीव कौशल ने बताया कि राज्य की सभी मार्केट कमेटियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों की सब्जियों के उत्पाद का मार्केटिंग एवं जे फार्म जारी करना सुनिश्चित करें। उनके अनुसार इस दौरान यदि किसी किसान को समस्या आती है तो वे जिला उद्यान अधिकारी व सब्जी मंडी में जिला विपणन प्रवर्तन अधिकारी मार्केटिंग बोर्ड से संपर्क कर सकता है।
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