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वैट रिफंड घोटाला: सीबीआई और हरियाणा सरकार को नोटिस

Mon, 11 Apr 2016 06:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कोर्ट - फोटो : file photo
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हरियाणा में हजारों करोड़ रुपए के वैट रिफंड घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है। इस मामले में जस्टिस परमजीत सिंह की एकल बेंच ने सीबीआई और हरियाणा सरकार समेत अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है।
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कोर्ट ने सभी पक्षों को 11 मई तक जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस मामले को दबाया जा रहा है, यह करीब एक लाख करोड़ रुपये का घोटाला है और बड़ी बिल्डर कंपनियों ने सरकार को चूना लगाया है।

कैथल के रघबीर सिंह और राजस्थान के शिव साहनी ने एडवोकेट प्रदीप रापड़िया के माध्यम से यह आरोप भी लगाया है कि वैट रिफंड घोटाले का पैसा मनी लांडरिंग में लगा हुआ है, लिहाजा इस मामले में डायरेक्टोरेट ऑफ इनफोर्समेंट से भी जांच कराई जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने ईडी को भी नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बड़े स्तर पर वैट रिफंड लिया गया, जबकि वैट अदा किया ही नहीं गया था।
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इसकी शिकायत लोकायुक्त से की गई और लोकायुक्त ने सरकार को जांच की सिफारिश की थी। राज्य के 10 जिलों में की जांच में सामने आया था कि 10 हजार 618 करोड़ रुपए का फर्जी वैट रिफंड हो गया। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि यह घोटाला एक लाख करोड़ रुपये का है।
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सभी पक्षों को 11 मई तक जवाब दाखिल करना होगा

कोर्ट - फोटो : demo pics
याचिका में कहा गया है कि इस मामले की जांच हिसार की डीईटीसी कमला चौधरी को सौंपी गई थी, लेकिन उन्होंने जांच नहीं की तो जांच तृप्ता शर्मा को दी गई। फिर भी जांच नहीं हुई तो आईजी श्रीकांत जाधव को जांच के लिए आईजी श्रीकांत जाधव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई, लेकिन बाद में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रोशनलाल ने जांच का दायरा कैथल जिले तक सीमित करने के लिए लोकायुक्त से आग्रह कर डाला।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक वक्त मौका ऐसा आ गया था कि जांच मुकम्मल होने को थी, लेकिन अब जांच से जुड़े अधिकारियों का तबादला किया जा रहा है। एक मंत्री ने जांच से जुड़े एक अधिकारी को जनहित मांग पर स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी। यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने सरकार को बार बार मांग पत्र सौंप कर जांच निष्पक्ष करने का आग्रह किया तो उन्हें धमकियां मिलनी शुरू हो गईं।

याचिका में मांग की गई है कि चूंकि यह मामला अंतर्राज्यीय है और देश की नामी बिल्डर कंपनियों ने सरकार को चूना लगाया है, ऐसे में सरकारी एजेंसियां निष्पक्ष जांच नहीं कर सकतीं, लिहाजा जांच केंद्रीय निष्पक्ष एजेंसी से कराई जानी चाहिए। वैट रिफंड की वसूली की जानी चाहिए मनी लांडरिंग की जांच होनी चाहिए।

साथ ही याचिकाकर्ताओं को सुरक्षा मुहैया कराई जाए। हाईकोर्ट ने सीबीआई, हरियाणा सरकार और ईडी को नोटिस जारी करके जवाब मांग लिया है। साथ ही याचिकाकर्ताओं को सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सभी पक्षों को 11 मई तक जवाब दाखिल करने को कहा है। 
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