स्वैग एनजीओ की तरफ से पीयू में एक सेमिनार आयोजित किया गया। जिसका मुख्य मकसद था कि समाज का कोई भी वर्ग शोषित न हो। अगर कोई महिला या पुरुष घरेलू हिंसा का शिकार हो रहा है तो उसे आवाज उठानी चाहिए।
इस सेमिनार में वर्णिका कुंडू भी पहुंची। वर्णिका ने कहा कि सभी को अपने हक की लड़ाई लड़नी चाहिए। जब तक हक के लिए आवाज बुलंद नहीं होगी, तब तक कोई नहीं सुनेगा। लॉ विभाग से प्रो. डॉ. श्रुति बेदी ने भी सेमिनार में कानूनी पहलुओं की जानकारी दी।
इस तरह से बदल गई जिंदगी
वर्णिका कहती हैं- किसी की भी जिंदगी में अगर कोई हादसा होता है तो उसकी जिंदगी बदल जाती है। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। रात के उस हादसे के बाद मेरी जिंदगी बदल गई। अब मुझे महिलाओं लड़कियों से जुड़े हर फंक्शन, डिस्कशन पैनल से बुलाने लगे हैं और अब मैं लिखना भी चाहती हूं।
साथ ही अपने काम पर वापिस लौटना चाहती हूं। वहीं वर्णिका की मां ने बताया- वर्णिका तो पहले भी दिल्ली से कई बार अपने काम से रात को ट्रेवल करके घर में पहुंचती थी। लेकिन सोचा नहीं था कि ऐसी घटना घटेगी।