चंडीगढ़। यूटी प्रशासन के कई कर्मचारियों की मकान के लिए 16 साल पुरानी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। इन कर्मचारियों के खिलाफ यूटी प्रशासन अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सोमवार को इस मामले में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की ओर से एसएलपी दायर की गई है। प्रशासन के इस कदम से कर्मचारी काफी दुखी हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रशासन के लिए उन्होंने पूरी जिंदगी काम किया। अब वही एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं कि कर्मचारियों को घर न मिले, जबकि हाईकोर्ट भी इस संबंध में आदेश जारी कर चुका है।
30 मई को आए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को दो महीने हो चुके हैं। हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को कड़ी फटकार लगाते हुए 2008 की सेल्फ फाइनेंसिंग इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम को सिरे चढ़ाने के निर्देश दिए थे। साथ ही अदालत ने मामले में आदेश जारी होने के दो महीने के भीतर सेल्फ फाइनेंसिंग हाउसिंग स्कीम की कंस्ट्रक्शन शुरू करने और एक वर्ष के भीतर 3930 फ्लैट तैयार करने के निर्देश दिए थे। दो माह का समय 31 जुलाई को पूरा हो गया है। प्रशासन का रुख देखते हुए कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की थी ताकि याचिका पर प्रथम सुनवाई के समय ही कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का मौका मिल सके। हाउसिंग इंप्लाइज सोसाइटी के उपाध्यक्ष नरेश कोहली ने कहा कि प्रशासन अपने ही कर्मचारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गया है, ये ठीक नहीं है। इससे कर्मचारी बहुत आहत हुए हैं। पिछले 16 साल से कर्मचारी अपने घर के इंतजार में हैं। 100 से ज्यादा लोग अपने फ्लैट्स का सपना लिए दुनिया से छोड़ गए और सैकड़ों लोग सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बहुत सारे कर्मचारी रिटायर होने वाले हैं। प्रशासन को ऐसा नहीं करना चाहिए था।