प्रशासन की लापरवाही की वजह से डॉक्टरों की नियुक्ति में यूटी काडर को खत्म कर दिया गया है। पिछले 26 वर्षों से यूटी काडर के एक भी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हुई है। खाली पड़े पदों को पंजाब व हरियाणा से डेपुटेशन पर आए डॅाक्टरों को ही तैनात किया जाता रहा है। पिछले वर्ष 63 डाक्टरों की रेगुलर पोस्ट मंजूर हुई थी। इन पोस्टों को पहले पंजाब व हरियाणा से भरने की कोशिश की गई। मगर डाक्टर नहीं मिले। विशेषज्ञ कहते हैं कि इन पोस्टों पर पहला हक चंडीगढ़ का है। चंडीगढ़ के डॉक्टरों को मौका देने के लिए प्रशासन को इन पदों को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के माध्यम से भरना था।
लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन ने यूपीएससी को फाइल आगे नहीं बढ़ाई। इन पदों को मंजूर हुए छह माह से ज्यादा का समय बीत चुके हैं।। यदि यूपीएससी के तहत पदों भरी जाती तो चंडीगढ़ मूल के डॉक्टरों को भी मौका मिलता। लगातार अनदेखी से यूटी काडर के डॉक्टरों में रोष है। उनका कहना है कि उनके प्रमोशन की एक सीमा है। एसएमओ के ऊपर उनके प्रमोशन नहीं हो सकते।
साल 1991 से नहीं हुई नियुक्तियां
आरोप हैं कि यूटी काडर की अनदेखी वर्ष 1991 से हो रही है। जो भी पोस्ट खाली होती थी, उसे पंजाब से भरा जाता या फिर हरियाणा से। एक भी बार चंडीगढ़ प्रशासन ने यूपीएससी को पत्र नहीं लिखा। इसके पीछे एक वजह यह भी है कि चंडीगढ़ के हेल्थ सचिव पंजाब से होते हैं या फिर हरियाणा से।