चंडीगढ़ पुलिस के तीन इंस्पेक्टरों ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में यूटी प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा ट्रिब्यूनल के आदेश की पालना न करने की दलील दी गई है। ट्रिब्यूनल ने पहले दिए आदेश में इंस्पेक्टरों की याचिका पर प्रशासन और पुलिस विभाग को दो महीने में फैसला लेने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद अब तक इस पर कोई फैसला न लिए जाने और उनकी डीएसपी पद पर प्रमोशन न होने की बात कही है। ट्रिब्यूनल ने याचिका पर यूटी प्रशासन और पुलिस विभाग को याचिका पर फैसला लेने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है।
अवमानना याचिका इंस्पेक्टर चरणजीत सिंह, गुरमुख सिंह और दिलशेर सिंह की ओर से दायर की गई है। सोमवार को याचिका पर यूटी प्रशासन की ओर से पेश हुए सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल ने दलील दी कि उन्होंने मामले में रिव्यू पीटिशन दायर की हुई है। साथ ही वह दो इंस्पेक्टरों अमराव सिंह व एक अन्य को प्रमोट कर चुके हैं। अन्य पर विचार किया जा रहा है। इस पर ट्रिब्यूनल ने प्रतिवादी पक्ष से डीएसपी के खाली पदों की सूची मांगी है।
इससे पहले भी अवमानना याचिका पर ट्रिब्यूनल 6 हफ्ते का समय दे चुका है। इसके बावजूद अब तक इस पर कोई फैसला न लिए जाने पर ट्रिब्यूनल ने यूटी प्रशासन को अब चार सप्ताह का और समय दिया है। साथ ही इस पर जल्द फैसला लेने के आदेश दिए हैं। बता दें कि इससे पहले यूटी पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर जसविंदर सिंह, उदय पाल रावत, अमराव सिंह और दिलशेर सिंह की ओर से भी याचिका दायर की गई थी। उसके बाद प्रशासन ने जसविंदर सिंह, उदयपाल रावत और अमराव सिंह को प्रमोट कर डीएसपी बना दिया था।
याचिका में यह दी थी दलील
इंस्पेक्टरों की ओर से दायर अपील में कहा गया था कि, ट्रिब्यूनल प्रतिवादी पक्ष को आदेश दें कि, वरिष्ठता के अनुसार यूटी पुलिस के योग्य इंस्पेक्टरों को डिप्टी सुपरीटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) के खाली पड़े पदों पर पंजाब पुलिस सर्विस रूल्स के तहत तैनाती देने पर विचार किया जाए। यह रूल वर्ष 2010 में संशोधित हुआ था। उनका कहना है कि भर्ती नियमों का उल्लंघन कर प्रतिनियुक्ति के जरिए दानिपस कैडर से डीएसपी का पद न भरा जाए। इंस्पेक्टरों की ओर से कहा गया था कि चंडीगढ़ में डीएसपी के 23 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 22 एग्जीक्यूटिव कैडर के हैं। वर्तमान में डीएसपी के पांच पद खाली हैं।