चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में सीनेट भंग करने के फैसले पर मचे बवाल के बीच केंद्र सरकार ने फिलहाल अपने नोटिफिकेशन इंप्लीमेंटेंशन को होल्ड कर लिया है। सीनेट पुनर्गठन से जुड़ा आदेश तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा। हालांकि इस फैसले ने परिसर में नई हलचल और भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
सुबह से छात्र संगठनों का धरना विश्वविद्यालय परिसर में जारी था। दिनभर विभिन्न राजनीतिक नेता धरनास्थल पर पहुंचते रहे। शाम करीब 4 बजे एक नोटिफिकेशन आया जिसमें लिखा गया कि केंद्र सरकार ने सीनेट भंग करने का फैसला वापस ले लिया है। कुछ देर बाद ही एक और नोटिफिकेशन सोशल मीडिया ग्रुपों में वायरल हुआ, जिसमें स्पष्ट किया गया कि फैसला फिर लागू किया जा रहा है।
इस विरोधाभासी सूचना से छात्र संगठनों में अफरा-तफरी मच गई। धरने पर बैठे छात्र संगठनों ने एकजुट होकर कहा कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के लोगों को गुमराह किया जा रहा है। सरकार ने दो नोटिफिकेशन निकाले हैं। एक नोटिफिकेशन नंबर 4867 रद्द कर रहा है तो नंबर 4868 नोटिफिकेशन फिर लागू कर रहा है।
पंजाब यूनिवर्सिटी बचाओ मोर्चा ने घोषणा की है कि इसके विरोध में 10 नवंबर को विश्वविद्यालय के गेट बंद किए जाएंगे, जबकि 7 नवंबर को ओपन मीटिंग आयोजित की जाएगी। इसके लिए पंजाब के सभी इंकलाबी संगठनों, किसान संगठनों और सभी पार्टियों के नेताओं को आमंत्रित किया गया है। यह मोर्चा सीनेट भंग करने के विरोध में गठित किया गया था।
मोर्चा के नेताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल विश्वविद्यालय की स्वायत्तता की नहीं, बल्कि पंजाब के अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। शाम को धरने पर प्रसिद्ध सिंगर जसबीर जस्सी भी पहुंचे। उन्होंने गीतों के माध्यम से विद्यार्थियों को समर्थन दिया और उनका हौसला बढ़ाया।
पंजाबी कभी भी केंद्र की तानाशाही के आगे नहीं झुकेंगे: कंग
आम आदमी पार्टी के सांसद मलविंदर सिंह कंग ने कहा कि केंद्र ने 4 नवंबर 2025 को एक नया नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें पंजाब यूनिवर्सिटी संबंधी 28 अक्टूबर के पुराने नोटिफिकेशन को वापस ले लिया गया। यह 30 अक्टूबर से लागू होना था, लेकिन धोखे से उसी दिन एक नया नोटिफिकेशन दोबारा जारी कर दिया। कंग ने कहा कि मिनटों के भीतर केंद्र ने उसी तारीख के साथ एक और नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें सिर्फ यह कहा गया कि जब भी भारत सरकार फैसला लेगी तब पहले वाला नोटिफिकेशन लागू होगा।
यह एक मजाक और पंजाबियों की भावना को परखने की जानबूझकर कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है। केंद्र सरकार के पास पीयू संबंधित कोई भी नोटिफिकेशन जारी करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। भाजपा पंजाबियों की भावनाओं के साथ खेलने की कोशिश कर रही है। पंजाबी कभी भी केंद्र की तानाशाही के आगे नहीं झुकेंगे। हम इस मुद्दे को पंजाब विधानसभा में लेकर जाएंगे और इस गैर-कानूनी नोटिफिकेशन को रद्द कराएंगे। भाजपा की गुंडागर्दी, दादागिरी और तानाशाही पंजाब में कभी भी सफल नहीं होगी।