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पंजाब के किसानों पर गंभीर आरोप : प्रवासियों को नशा देकर कराते हैं मजदूरी, गृह मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट

Fri, 02 Apr 2021 04:27 AM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजा पत्र 
  • मामले में कार्रवाई कर गृह मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपने को कहा
  • पत्र में लगाए आरोपों के संबंध में नहीं दिए कोई तथ्य और शिकायतें
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पंजाब में खेत में काम करता मजदूर। - फोटो : PTI
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विस्तार
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब के किसानों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गृह मंत्रालय ने पंजाब की मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजे पत्र में कहा है कि राज्य के सीमांत जिलों के किसान उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले खेत मजदूरों को पहले नशे का आदी बनाते हैं फिर उन्हें बंधक बनाकर अपने खेतों में अमानवीय तरीके से काम कराते हैं। पत्र में राज्य सरकार से कहा है कि वह इस संबंध में कार्रवाई कर गृह मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपे।

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गृह मंत्रालय ने पत्र में कहा है कि बीएसएफ की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि पंजाब के सीमांत जिलों गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और अबोहर में यूपी और बिहार राज्यों से आने वाले मजदूरों से किसान बंधुआ मजदूरी करा रहे हैं। बीएसएफ ने 2019 व 2020 के दौरान 58 बंधक मजदूरों को छुड़ाकर पंजाब पुलिस के हवाले किया है। हालांकि पत्र में आरोपों के बारे में कोई तथ्यात्मक दस्तावेज या शिकायत की जानकारी नहीं भेजी गई है। 

पत्र के मुताबिक मजदूरों को अक्सर नशा देकर खेतों में काम करवाया जाता है। तय समय से भी ज्यादा काम करवाकर उन्हें मजदूरी भी नहीं दी जाती। पंजाब के सीमांत जिलों में खेतों में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर यूपी और बिहार के पिछड़े इलाकों और गरीब परिवारों से संबंधित हैं। मानव तस्करी करने वाले गिरोह ऐसे मजदूरों को अच्छे वेतन का लालच देकर पंजाब लाते हैं लेकिन पंजाब पहुंचने पर उनका शोषण किया जाता है। उनसे अमानवीय व्यवहार किया जाता है। पत्र में गृह मंत्रालय ने पंजाब के किसानों पर मानवाधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार से मांग की है कि वह इस संबंध में कार्रवाई कर मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपे।
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पंजाब-यूपी के आंदोलनकारी किसानों में फूट डालने की कोशिश बताया 
इस संबंध में जब पंजाब के सीएमओ (मुख्यमंत्री कार्यालय) के एक अधिकारी को गृह मंत्रालय का पत्र दिखाते हुए जानकारी मांगी गई तो उन्होंने केवल इतना ही कहा कि इस संबंध में राज्य सरकार जवाब देगी। उन्होंने कहा कि पत्र में किसी भी घटना के तथ्यों की जानकारी नहीं दी गई, न ही कोई सुबूत पेश किया गया है। 2019 और 2020 के मामलों पर इतनी देर बाद मार्च 2021 में रिपोर्ट मंगाना भी अजीब है। यह पत्र मौजूदा किसान आंदोलन के कारण भेजा गया है। यह सूबे के किसानों को बदनाम करने की कोशिश है। यह पंजाब व यूपी के आंदोलनकारी किसानों में फूट डालने की कोशिश से अधिक कुछ नहीं लगता। 

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