पंजाब में पारंपरिक खेती करने वाले किसानों को केंद्रीय बजट से निराशा हाथ लगी है। किसान आंदोलन के बीच किसान पारंपरिक खेती के क्षेत्र में विशेष पैकेज मिलने की आस लगाए हुए थे लेकिन केंद्रीय बजट में इसको लेकर कोई प्रावधान नहीं किया गया। अर्थशास्त्री और कृषि मामलों के जानकार भी अब केंद्र के 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के वादे पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सरकार के पास किसानों के लिए निराशा के अलावा कुछ नहीं है। केंद्र सरकार हर क्षेत्र में उद्यमियों को शामिल कर रही है, लगभग हर क्षेत्र में ही दोनों के बीच गठजोड़ बन गया है। जितनी भी फसलें हैं उन पर लाभकारी एमएसपी और उस मूल्य पर खरीद की गारंटी नहीं होगी तो किसानों की आय कभी भी दोगुनी नहीं हो पाएगी। - सुखदेव सिंह कोकरी कलां, महासचिव, भाकियू एकता (उगराहां)।
2018-19 में नीति आयोग के एक नोटिफिकेशन में कहा गया था कि किसानों की आय को बढ़ाने के लिए देश की कृषि ग्रोथ 10 प्रतिशत से अधिक करनी होगी लेकिन अभी तक सरकार की ओर से इस संबंधी कोई भी कदम नहीं उठाया गया है। अब केंद्र के 2022 में किसानों की आय दोगुनी करने के वादे पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। - प्रोफेसर सतीश वर्मा, चेयर प्रोफेसर, आरबीआई।