चंडीगढ़। स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट की कमी के चलते चरमरा रही व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास शुरू कर दिया गया है। इसकी शुरुआत जीएमएसएच-16 के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में एक सेवानिवृत्त रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की गई है। अब अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की महीनों से बंद अल्ट्रासाउंड मशीन से गर्भवती महिलाओं की जांच होने लगी है। इससे विभाग में आने वाली गर्भवती महिलाओं के साथ रेडियोडाइग्नोसिस में तैनात डॉक्टरों ने भी राहत की सांस ली है क्योंकि स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग से अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती महिलाओं को वहां भेजा जा रहा था। जहां पहले से ही तीनों सिविल अस्पतालों और जीएमएसएच-16 की ओपीडी का दबाव है।
बता दें कि अमर उजाला ने सरकारी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट की कमी से हो रही परेशानी को लगातार प्रमुखता से उठाया है। 22 नवंबर 2022 को मनीमाजरा सिविल अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट ने तीन अक्तूबर को नौकरी छोड़ी, तब से अल्ट्रासाउंड बंद। 19 दिसंबर 2023 को एक साल से रेडियोलॉजिस्ट की तलाश जारी अल्ट्रासाउंड मशीन चादर से ढककर किनारे रखी और 14 जनवरी 2023 को स्वास्थ्य विभाग का हाल, एमआरआई चंद घंटों में, अल्ट्रासाउंड दो महीने बाद शीर्षक के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद से विभाग लगातार रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए प्रयास कर रहा है। अब पीपीपी मोड पर विशेषज्ञों की कमी दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।