फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सफाई टेंडर घोटाला : तीन माह बाद भी यूएलबी ने नहीं दिया जवाब, अटकी एसीबी की कार्रवाई

विज्ञापन
विज्ञापन
-एसीबी ने सरकार से कर रखी है आईएएस आरके सिंह और सुमेधा कटारिया पर केस दर्ज करने की सिफारिश
विज्ञापन

-मुख्य सचिव कार्यालय ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त को भेजी थी फाइल, मांगी थी विभाग की टिप्पणी

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंचकूला नगर निगम में सफाई के टेंडर घोटाले के आरोपी आईएएस आरके सिंह और सेवानिवृत्त आईएएस सुमेधा कटारिया के मामले में तीन माह बीतने पर भी शहरी स्थानीय विभाग के आयुक्त की टिप्पणी नहीं आ पाई है। मामले में हो रही देरी को देखते हुए अब मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से शहरी स्थानीय निकाय विभाग को जल्दी यह फाइल भेजने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) हरियाणा की ओर से जुलाई में मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आईएएस आरके सिंह और सेवानिवृत्त आईएएस सुमेधा कटारिया के खिलाफ केस दर्ज करने की अनुमति मांगी गई थी। मुख्य सचिव कार्यालय ने इस संबंध में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त को यह फाइल भेजी थी और इस मामले में विभाग की टिप्पणी मांगी थी। क्योंकि मामला शहरी स्थानीय निकाय विभाग में सफाई टेंडर से जुड़ा है और दोनों अधिकारियों पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप हैं। दोनों आईएएस अधिकारी पंचकूला नगर निगम में आयुक्त पद पर तैनात रहे हैं। एसीबी रिपोर्ट के मुताबिक कटारिया पर डंपिंग ग्राउंड से कूड़ा उठाने के टेंडर में गड़बड़ी करने के आरोप हैं। वहीं, आरके सिंह पर आरोप है कि उन्होंने टेंडर की शर्तों के अनुसार काम नहीं कराया और नियमों के विपरीत कंपनी के बिलों की अदायगी भी करा दी। तीन माह से अधिक समय होने पर भी विभाग की ओर से मुख्य सचिव कार्यालय को अपनी टिप्पणी के साथ फाइल नहीं भेजी गई है। इस संबंध में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त विकास गुप्ता को फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
विज्ञापन

बाॅक्स
निकाय के दर्जनभर अधिकारी भी संदेह के घेरे में

दोनों आईएएस के अलावा शहरी स्थानीय निकाय विभाग के दर्जनभर से अधिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है। सुमेधा कटारिया के समय में एचसीएस संयम गर्ग, एसई विजय गोयल, कार्यकारी अभियंता अंकित लोहान के साथ-साथ सफाई शाखा के अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। वहीं, आरके सिंह के समय में जेई से लेकर सफाई शाखा के कई अधिकारियों के नाम शामिल हैं।
विज्ञापन

बाॅक्स
काफी अहम है विभाग की टिप्पणी
इस मामले में शहरी स्थानीय निकाय विभाग की टिप्पणी काफी अहम होगी। क्योंकि एसीबी ने कई माह तक जांच के बाद पाया था कि फर्म ने सेटिंग के माध्यम से बिना कूड़े का निष्पादन किए ही निगम से 1.75 करोड़ रुपये की अदायगी करा ली। ये काम कोई भी अधिकारी अकेले नहीं कर सकता है, इसलिए विभाग की टिप्पणी ही इस मामले में दोनों आईएएस और अन्य अधिकारियों के भविष्य को तय करेगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें