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ट्रेन में भारतीय सेना की दो महिला अधिकारियों ने कराया आपात प्रसव, बचाई जच्चा-बच्चा की जान

Sun, 29 Dec 2019 03:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा मोहित धुपड़, चंडीगढ़
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महिला कैप्टन ललिता हंस और कैप्टन अमनदीप कौर ने चलती ट्रेन में करवाई इमरजेंसी प्री-मैच्यूर डिलीवरी - फोटो : अमर उजाला
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भारतीय सेना के अफसरों ने एक बार फिर दिखा दिया कि वे सरहद ही नहीं, बल्कि समाज के भी प्रहरी हैं। भारत और भारतीयों की सेवा उनके लिए सदैव सर्वोपरि है और अपने कर्त्तव्यों को लेकर वे हमेशा सजग रहते हैं। 

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ऐसा ही एक उदाहरण अमृतसर से हावड़ा तक जाने वाली हावड़ा एक्सप्रेस में उस वक्त देखने को मिला, जब पंजाब स्थित सेना की 15 डिवीजन के अधीनस्थ गुरदासपुर के सैन्य अस्पताल टिबरी कैंट की दो महिला कैप्टन ललिता हंस और कैप्टन अमनदीप कौर ने चलती ट्रेन में एक आपात स्थिति के दौरान बड़ा जोखिम उठाते हुए 21 वर्षीय महिला (कोमल) की प्रसव करवाई।

आपात स्थिति इतनी ज्यादा था कि ट्रेन को चैन पुलिंग के जरिये बीच में कहीं रोककर महिला को तुरंत अस्पताल पहुंचाना संभव नहीं था। महिला और उसके गर्भ में बच्चे की जान आफत में थी। ऐसे में सेना की दोनों नर्सिंग अफसर कैप्टन ललिता और अमनदीप ने बड़ा रिस्क उठाते हुए चलती ट्रेन में ही डिलीवरी करवाने का फैसला लिया और नार्मल डिलीवरी करवाकर मां कोमल और उसकी नवजात बेटी की जान बचाई। 
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यात्री भी दोनों महिला कैप्टन आफिसर्स की इस मदद से खासे उत्साहित हुए और उन्होंने तालियों की गूंज व ‘इंडियन आर्मी जिंदाबाद’ के नारे लगाकर उनका आभार व्यक्त किया। ऐसी स्थिति में अपने हाथों में नवजात बेटी को पाकर कोमल भी काफी भावुक हो गई।

यात्री के शेविंग ब्लेड, नार्मल धागे, हॉट वॉटर बॉटल से करवाया प्रसव
दोनों महिला कैप्टन हावड़ा एक्सप्रेस से लखनऊ अपने बेसिक नर्सिंग आफिसर्स कोर्स में शिरकत करने जा रही थीं। वे ट्रेन की बोगी नंबर बी-वन में सवार थीं और इसी बोगी में 21 वर्षीय गर्भवती कोमल भी अपने परिवार के साथ सवार थी। ट्रेन नजीबाबाद और मुरादाबाद के बीच थी और वक्त था 27 दिसंबर अल सुबह 3.50 मिनट। 

बोगी में सभी यात्री अपनी सीटों पर सो रहे थे, तभी गर्भवती कोमल को तेज प्रसव पीड़ा उठी और वे ट्रेन में लगातार चिल्लाने लगी। यात्री भी मदद के लिए महिला के पास पहुंचे, मगर महिला की स्थिति देखकर सभी दंग रहे। महिला लगातार चिल्ला रही थी। तभी सेना की इन दोनों कैप्टन आफिसर्स ने अपना परिचय देते हुए मदद की पेशकश थी। 

महिला की स्थिति काफी नाजुक होती जा रही थी जिस पर तुरंत डिलीवरी करवाई जानी थी। दोनों महिला कैप्टन ने इस मोर्चे पर भी कमान संभाली और चलती ट्रेन में ही यात्रियों से तुरंत शेविंग ब्लेड धागे और हॉट वॉटर बोटल के गरम पानी के इंतजाम करने को कहा। यात्रियों ने भी अपना दायित्व समझते हुए हड़कंप की स्थिति को छोड़ दोनों महिला कैप्टन के दिशा-निर्देशों पर काम करना शुरू कर दिया। 

अभी मुरादाबाद स्टेशन आने को 20 मिनट बाकी थे। डिलीवरी प्रक्रिया शुरू हुई और मौके पर जो कुछ भी उपलब्ध हुआ, दोनों महिला कैप्टन ने उसी से कोमल की 20 मिनट में नार्मल डिलीवरी करवाकर उसकी व नवजात बच्ची की जान बचा ली। 

मुरादाबाद स्टेशन पर रेलवे की चिकित्सा अधिकारी को भी पहले ही सूचित किया जा चुका था। लिहाजा वहां पहुंची चिकित्सा अधिकारी ने भी कोमल को मुरादाबाद में अटैंड किया और सबकुछ सही पाए जाने पर कोमल को उसके गंतव्य रायबरेली तक सफर की अनुमति दी।

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