चंडीगढ़। सात साल पहले शहर के शौचालयों की इमारतों पर विज्ञापन लगाने के नाम पर 13 करोड़ के गबन के मामले में सोमवार को दो गवाह सीबीआई अदालत में पेश हुए। इनमें वरिंदर कुमार शर्मा और मोहन सिंह शामिल हैं। उधर सीबीआई के वकील ने टेंडर से जुड़े बिल पेश करने की अनुमति मांगी, जिसे सीबीआई जज ने मंजूर कर लिया। इन दोनों गवाहों के अलावा पूर्व मेयर हरजिंदर कौर भी अदालत पहुंचीं। यह गबन एक कांट्रैक्टर ने किया था। उस समय निगम में हरजिंदर कौर मेयर थीं। अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी वकील की दलील के बाद दोनों गवाहों की गवाही पूरी नहीं हुई है। इस केस में टेंडर के बिल अहम सबूत माने जा रहे हैं। सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर आरसी दीवान ने टेंडर अलॉट करते समय कई गलतियां की थीं जोकि पिछली पेशी में सामने आ चुकी हैं। यही कारण है कि सीबीआई वकील ने मंगलवार को अदालत में टेंडर के बिल पेश करने के लिए दलील दी थी। बिल पेश होने के बाद सभी गवाहों की गवाही दर्ज होगी। सरकारी वकील ने कहा कि इस मामले में आरोपी नगर निगम के सेवानिवृत्त सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर आरसी दीवान ने टेंडर अलॉटमेंट के दौरान कंपनियों से सांठगांठ की थी। उन्होंने टेंडर से जुड़ी सभी बातों को पहले ही कंपनियों को बता दिया था ताकि उनको फायदा मिल सके। इस मामले में सेलवेल कंपनी के डायरेक्टर जिम्मी सुब्बावाला, जनरल मैनेजर विश्वदीप दत्ता और आउटडोर कम्युनिकेशन कंपनी के डायरेक्टर मयसा गणेश भी आरोपी हैं।