चंडीगढ़। सेक्टर-22 में बुधवार को आवारा कुत्ते ने दो लोगों को काट लिया। इसके बाद दोनों सेक्टर-19 स्थित डिस्पेंसरी पहुंचे, जहां एंटी रैबीज इंजेक्शन दिया गया। बुधवार को दिनभर में सेक्टर 22, 16 व 19 की डिस्पेंसरी में 75 से ज्यादा कुत्ते के काटने के केस सामने आए।
सेक्टर-22 डी निवासी अंजू सोनी (49) ने बताया कि वह घर के बाहर निकली ही थी। एक कुत्ता आया और उन पर झपट पड़ा। कुत्ते को हाथ से भगाया तो उसने पैर पर काट लिया, जिससे घाव हो गया और खून आ गया। अंजू के पति राकेश सोनी तत्काल उन्हें सेक्टर-19 स्थित डिस्पेंसरी लेकर गए, जहां उन्हें एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाया गया। वहीं, थोड़ी देर में एक और युवक डिस्पेंसरी पहुंचा। उसने बताया कि सेक्टर-22 में ही उसे भी एक कुत्ते ने काट लिया है। शहर की तीन डिस्पेंसरी में पूरे दिन 75 से ज्यादा लोग एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचे। इससे लोगों में काफी दहशत है।
गर्मियों में बढ़ जाती हैं कुत्तों के काटने की घटनाएं
शहर में कुत्तों की संख्या में जितनी तेजी से इजाफा हो रहा है, उतनी ही तेजी से कुत्तों के काटने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। निगम इन घटनाओं पर रोक लगाने का दावा तो करता है, लेकिन कई बार हादसे इतने वीभत्स होते हैं कि लोगों का गुस्सा फूट जाता है। वहीं, गर्मियों में केस बढ़ने के बाद अस्पतालों में वैक्सीन भी नहीं मिलती। इससे लोगों को और समस्या होती है।
हमारे पास एंटी रैबीज इंजेक्शन का स्टॉक : डॉ. नागपाल
मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. वीके नागपाल ने बताया कि वैसे तो सभी डिस्पेंसरी में एंटी रैबीज वैक्सीन की व्यवस्था है। सेक्टर-19 और 38 की डिस्पेंसरी में प्रमुख रूप से इन वैक्सीन को रखा गया है। फिलहाल सभी लोगों को वैक्सीन लगाया जा रहा है। रही बात स्टॉक की तो अभी सभी डिस्पेंसरी में एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध है। आगे भी तैयारी रखेंगे ताकि तत्काल वैक्सीन उपलब्ध हो सके।
प्रशासन और निगम की सख्ती का नहीं कोई असर
प्रशासन ने गार्डन में कुत्तों के घुमाने और पालने वालों के खिलाफ कानून तो सख्त बना दिए, लेकिन उसका असर नहीं दिखता। लोग लगातार आवारा कुत्तों को रोटी व अन्य सामान डालते हैं, लेकिन उनकी जिम्मेदारी लेने से पीछे भागते हैं। वहीं, पार्कों में कुत्तों को घुमाने पर जुर्माना 500 रुपये से बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दिया गया है, लेकिन लोगों ने सवाल किया कि अब वह अपने पालतू कुत्तों को लेकर कहां जाएं। इसे लेकर कई बार विवाद हो चुके हैं। झगड़े इतने बढ़े कि पुलिस को जाकर मामला शांत कराना पड़ा।
बीते साल हुआ था बड़ा आयोजन
बीते साल 28 सितंबर को प्रशासक के निर्देश पर नगर निगम ने एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया था। एंटी रैबीज डे पर आयोजित कार्यक्रम में देशभर के विशेषज्ञ आए थे। विशेषज्ञों ने कुत्तों के काटने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कई सुझाव दिए थे, लेकिन आज तक किसी भी सुझाव पर कोई काम नहीं किया किया गया, जबकि आयोजन में लाखों रुपये खर्च हुए थे।
10 माह से बंद था कुत्तों की नसबंदी का काम
किसी कंपनी के न आने से कुत्तों की नसबंदी का काम 10 माह से बंद था। हाल ही में हुई वित्त एवं अनुबंध कमेटी की बैठक में तय किया गया कि अब नगर निगम अपने ही वेटरिनरी डॉक्टर से शहर के लावारिस कुत्तों की नसबंदी कराएगा।